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Thursday, March 23, 2017

हैवलॉक द्वीप - गोविंदनगर बीच और वापस पॉर्ट ब्लेयर

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22 जनवरी, 2017
‘पानो इको रिसॉर्ट’ में हम ठहरे थे। यह गोविंदनगर बीच के बिल्कुल बगल में है। अच्छा बना हुआ है।
हैवलॉक से हमें आज शाम को निकलना था, लेकिन बोट की बुकिंग न मिल पाने के कारण सुबह वाली बोट में ही बुकिंग करनी पड़ी थी। इस तरह हैवलॉक जैसे खूबसूरत स्थान को देखने के लिये हमारे पास चौबीस घंटे भी नहीं थे। कल राधानगर बीच देख लिया, आज बगल में मौज़ूद गोविंदनगर को देख लेते हैं।
हम नहाने की तैयारी के साथ गये थे, लेकिन जब कोरल चट्टानें देखीं तो नहाने का इरादा त्याग दिया। पानी एकदम शांत था। बड़ी दूर तक पानी में गहराई भी नहीं थी। इक्का-दुक्का पर्यटक ही थे। उनमें भी कई स्कूबा डाइविंग के लिये जाने वाले थे। हमें इस तरह की ‘एक्टिविटी’ रास नहीं आतीं। परसों स्नॉरकलिंग कर ली, बहुत हो गया।

Monday, March 20, 2017

राधानगर बीच @ हैवलॉक द्वीप

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21 जनवरी 2017
वही जहाज जिससे हम कल नील द्वीप आये थे, हमें आज हैवलॉक ले जायेगा। आज सुबह साढ़े सात बजे यह पॉर्ट ब्लेयर से चलेगा और साढ़े नौ बजे नील आ जायेगा। आधे घंटे बाद हैवलॉक के लिये प्रस्थान कर जायेगा।
यहाँ सुबह जल्दी हो जाती है, लेकिन अपनी आदत वही आठ-नौ बजे सोकर उठने की है। होटल का चेक-आउट समय साढ़े सात बजे था। मुझसे पहले दीप्ति उठ गयी। चमत्कार! कहने लगी कि उठ, समुद्र तट पर चलकर नहाते हैं। मैंने मना कर दिया। वह आराम से बिना गुस्सा किये चली गयी। महा चमत्कार!!
जल्दी ही वापस लौट आयी - बिना नहाये। बताया कि यह कोरल तट है। नहाना बहुत मुश्किल है। कोरल तटों पर चोट बड़ी आसानी से लगती है और लगती भी ऐसी है कि खून निकल आता है।

Thursday, March 16, 2017

नील द्वीप: भरतपुर बीच और लक्ष्मणपुर बीच

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20 जनवरी 2017
नैचुरल ब्रिज से पैदल मुख्य बाज़ार तक आने में थक गये। गर्मी भी थी और उमस भी। बाज़ार से भरतपुर बीच आधा किलोमीटर दूर है। पहुँच गये। लेटने की जगह मिल गयी और मैं सो गया।
नील द्वीप पर भरतपुर, सीतापुर, लक्ष्मणपुर और रामनगर सब बीच हैं।
मुझे समुद्र तटों का कोई अनुभव नहीं है। न ही यह पता कि फलाँ बीच ख़ूबसूरत है और फलाँ नहीं है। सभी तट एक-जैसे लगते हैं। मुझे न किसी बीच की विशेषता पता है और न ही वहाँ की ख़ूबियाँ। यही बात आपको इन यात्रा-वृत्तांतों में भी दिख रही होगी। अंडमान यात्रा को मैं पूरे अधिकार से नहीं लिख पा रहा हूँ। दिल पहाड़ों और ट्रेनों में ही बसता है ना।
दो घंटे सो लेने के बाद बड़ा अच्छा लगने लगा। यहाँ भीड़ नहीं थी, लेकिन चहल-पहल थी। कुछ दुकानें थीं, जहाँ केवल एजेंट लोग बैठे थे - समुद्री गतिविधियाँ कराने के लिये। बीच तो रेतीला और साफ़-सुथरा था, लेकिन आगे समुद्र में कोरल थे। इसलिये स्कूबा डाइविंग का अच्छा काम हो रहा था। हाई स्पीड़ वाटर स्कूटर वाला लड़कियों को सैर करा रहा था और तब तक समुद्र में कलाबाजियाँ कराता रहता, जब तक कि लड़की की चीख न निकल जाये।

Monday, March 13, 2017

नील द्वीप में प्राकृतिक पुल के नज़ारे

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20 जनवरी 2017
फोनिक्स-बे जेट्टी - हाँ यही नाम है इस जेट्टी का गूगल मैप में। नील और हैवलॉक जाने वाली बोट यहीं से चलती हैं। हमारी आज की नील द्वीप जाने की बुकिंग थी। सुबह सात बजे जहाज को चलना था, हम साढ़े छह बजे ही पहुँच गये। सुरक्षा-जाँच और चेक-इन के बाद वातानुकूलित जहाज में अपनी-अपनी सीटों पर जा बैठे।
दो घंटे की यह यात्रा थी। समुद्र अशांत था - शायद यह शांत ही कभी-कभार होता होगा। बड़ी-बड़ी लहरें आ रही थीं। भारी-भरकम जहाज को भी अच्छी तरह हिला देतीं। जी.पी.एस. चलाकर जहाज की गति नापी। यह बीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रहा था। वैसे समुद्री दूरियों को ‘नॉटिकल मील’ में नापते हैं, लेकिन मुझे किलोमीटर ही समझ आता है।
इससे पहले कि हमें समुद्री बीमारी होती और उल्टी आती, हमने मोबाइलों में अपने-अपने पसंदीदा गेम खेलने शुरू कर दिये। मैंने अपने गेम में न जाने कितनी लंबी रेलवे लाइन बिछाकर इस पर ट्रेनें चलायीं और दीप्ति ने ‘सबवे सर्फ़र’ में न जाने कितनी ट्रेनों में टक्कर मारी। इस जहाज पर डेक पर जाने की मनाही थी।

Thursday, March 9, 2017

नॉर्थ-बे बीच: कोरल देखने का उपयुक्त स्थान

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डेढ़ घंटा रॉस द्वीप पर घूमने के बाद हम वापस जेट्टी पहुँच गये। समय की पाबंदी का उदाहरण देखिये - हमारी बोट नंदिनी जेट्टी पर लगायी जा रही थी। अब यह हमें नॉर्थ-बे ले जायेगी।
इसे नॉर्थ-बे आइलैंड़ भी कहा जाता है, लेकिन मैं इसे ‘आइलैंड़’ नहीं कहूँगा। वैसे तो पूरा अंडमान-निकोबार ही द्वीप-समूहों से बना है। पोर्ट ब्लेयर भी एक द्वीप ही है - बहुत बड़ा द्वीप - इसका नाम है दक्षिणी अंडमान। तो यह जो नॉर्थ-बे है ना, यह पोर्ट ब्लेयर वाले मुख्य द्वीप का ही हिस्सा है। यह रॉस आइलैंड़ की तरह अलग से कोई द्वीप नहीं है। इसलिये इसे नॉर्थ-बे द्वीप कहना गलत है। यह दक्षिणी अंडमान द्वीप का एक हिस्सा है और समुद्री-तट होने के कारण इसे ‘नॉर्थ-बे बीच’ कहना ज्यादा उपयुक्त है, ‘नॉर्थ-बे आइलैंड़’ नहीं।
समुद्र में बड़ी उथल-पुथल थी। लहरें नाव को ऊपर उठा देतीं और फिर धड़ाम से नीचे पटक देतीं। इससे इतना पानी छलकता कि नाव के भीतर भी आ जाता।

Monday, March 6, 2017

रॉस द्वीप - ऐसे खंड़हर जहाँ पेड़ों का कब्ज़ा है

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19 जनवरी, 2017
कल जब हम सेलूलर जेल से लौट रहे थे, तो ‘अंडमान वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स’ दिखायी दिया। यही अबरडीन जेट्टी भी है। जेट्टी मतलब ‘बोट-अड्डा’। यहाँ से रॉस द्वीप और नॉर्थ-बे के लिये बोट चलती हैं। चूँकि ये दोनों स्थान पास ही हैं और यहाँ से दिखायी भी देते हैं, इसलिये किसी भी तरह की एड़वांस बुकिंग की आवश्यकता नहीं।
सरकारी बोट भी चलती होगी, जो प्राइवेट से सस्ती होती होगी। लेकिन हमने प्राइवेट बोट चुनी। दोनों स्थानों पर आने-जाने का इनका किराया 550 रुपये प्रति व्यक्ति था। प्रत्येक बोट का अपना एक नाम होता है। हमें जो बोट मिली, उसका नाम था नंदिनी। यही बोट हमें पहले रॉस द्वीप ले जायेगी, फिर नॉर्थ-बे ले जायेगी और आख़िर में वापस अबरडीन जेट्टी भी लायेगी। रॉस द्वीप पर डेढ़ घंटा रुकना था और नॉर्थ-बे पर ढाई घंटे।

Thursday, March 2, 2017

अंडमान यात्रा: सेलूलर जेल के फोटो

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18 जनवरी, 2017
तो ऐसा हुआ कि हम पोर्ट ब्लेयर उतर गये - हवाई जहाज से। मरीन रोड़ पर एक होटल में एक कमरा बुक था ही। 100 रुपये में एक ऑटो वाला तैयार हो गया चलने को। वैसे यहाँ बसें भी खूब चलती हैं, जो दस-दस रुपये में आपको एयरपोर्ट से अबरडीन बाज़ार या मरीन रोड़ पहुँचा देती हैं। मुख्य लोकल बस अड्डा इन दोनों स्थानों के बीच में है।
तो हमें इस बात का उस समय पता नहीं था। प्रत्येक अंडमानी की तरह यह ऑटोवाला भी बहुत अच्छा था। चलते-चलते ही हमारा कार्यक्रम पूछा और आज ही नील व हैवलॉक आने-जाने के टिकट बुक करा लेने की सलाह दे दी। प्राइवेट जहाज वालों के ऑफिस में ले गया और थोड़ी ही देर में हमारे पोर्ट ब्लेयर से नील, नील से हैवलॉक और हैवलॉक से पोर्ट ब्लेयर के जहाजों में बुकिंग हो गयी। वैसे हमारे पास सरकारी जहाज से आने-जाने का भी विकल्प था, लेकिन सुना है कि सरकारी और प्राइवेट के किराये में ज्यादा अंतर नहीं होता, तो हमने प्राइवेट में ही बुकिंग कर ली। टिकटों की मारामारी का आलम यह था कि पाँच दिन पहले भी हैवलॉक से पोर्ट ब्लेयर आने के लिये हमें अपने इच्छित समय वाले जहाज में खाली सीट नहीं मिली।