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Monday, October 26, 2015

यात्रा आयोजन- जलोडी जोत, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क और पराशर झील

अभी पिछले सप्ताह मैं ग्वालियर में था। प्रशान्त जी के यहां डिनर का आनन्द ले रहा था। तभी उन्होंने सुझाव दिया कि अगले साल वे कई मित्र लद्दाख जायेंगे और मैं उनकी अगवानी करूं। किराये की गाडी लेंगे और निकल पडेंगे। उस समय वहां बैठे-बैठे इस मुद्दे पर खूब बातें हुईं।
वापस दिल्ली आकर मैं इस बारे में सोचने लगा। ऐसा नहीं है कि इस तरह की यात्राएं आयोजित करने के बारे में मैं पहली बार सोच रहा हूं। पहले भी मन में इस तरह के विचार आये हैं। क्या मैं इस तरह का आयोजन कर सकूंगा? इसमें जबरदस्त टीम-वर्क की आवश्यकता पडती है और अलग-अलग तरह के लोगों के साथ रहना भी होता है और उनकी समस्याएं सुननी-सुलझानी भी पडती हैं। मेरी प्रकृति अकेले रहने और भ्रमण करने की रही है। पहले भी कई बार यात्राओं पर अपने साथियों से मनमुटाव होता रहा है।
निशा के आने के बाद बहुत बडा परिवर्तन हुआ है। पहले पहले हमारी बहुत लडाई होती थी, अब सब ठीक होने लगा है। एक टीम-भावना मेरे अन्दर जाग्रत होने लगी है। सामने वाला क्या चाहता है, उसके अनुसार मैं स्वयं को ढालने लगा हूं।
अब अगर मैं एक समूह को लेकर लद्दाख जाता हूं तो कई तरह की परेशानियां सामने आयेंगी। कुछ परेशानियों के बारे में तो मैं अभी भी सोच सकता हूं लेकिन कुछ परेशानियां अनुभव-जनित होती हैं। इसलिये पहले छोटे पैमाने पर ऐसा कुछ किया जाये। काफी सोच-विचार के बाद हिमाचल में तीर्थन घाटी पसन्द आई। वैसे बीड-बिलिंग-बरोट, छितकुल-किन्नौर, उत्तराखण्ड में मुन्स्यारी भी मेरी इस सूची में शामिल थे। तीर्थन घाटी में दो तरफ से जाया जा सकता है- नारकण्डा की तरफ से और मण्डी की तरफ से। इसलिये इतना तो पक्का था कि एक तरफ से जायेंगे और दूसरी तरफ से आयेंगे।
कितने दिनों का कार्यक्रम होगा? शनिवार-रविवार को जोडना तो जरूरी था। हालांकि मेरी छुट्टी नहीं होती लेकिन ज्यादातर मित्रों की इन दिनों छुट्टी रहती है। नवम्बर का कैलेण्डर देखा तो बुधवार 25 तारीख को गुरू नानक जयन्ती है जो कि एक सरकारी छुट्टी है। इस तरह आपको दो दिनों यानी सोमवार और मंगल की ही छुट्टी लेनी पडेगी। 21 से 25 नवम्बर का कार्यक्रम पक्का हो गया।
अब जब पांच दिन हाथ में हों तो क्या-क्या किया जा सकता है? यह तो निश्चित है कि यह यात्रा या तो क्लोकवाइज होगी या फिर एण्टी-क्लोकवाइज। या तो मण्डी की तरफ से जाकर शिमला की तरफ से आयेंगे या फिर शिमला की तरफ से जाकर मण्डी की तरफ से आयेंगे। चलिये पहले बात करते हैं शिमला की तरफ से जाना और मण्डी की तरफ से आना। कार्यक्रम इस तरह बनाया जा सकता है।

पहला दिन- 21 नवम्बर- शनिवार (दिल्ली से नारकण्डा, 420 किमी)
दिल्ली से सुबह प्रस्थान करेंगे और पानीपत, अम्बाला, कालका, शिमला होते हुए नारकण्डा पहुंचेंगे। रात्रि विश्राम नारकण्डा में करेंगे। हो सकता है कि हम शिमला के रास्ते न जाकर कण्डाघाट से चायल वाला रास्ता पकड लें। यह जंगल के बीच से जाता हुआ बेहद शानदार रास्ता है और इस पर कोई ट्रैफिक भी नहीं होता।

दूसरा दिन- 22 नवम्बर- रविवार (नारकण्डा-हाटू-जलोडी जोत, 100 किमी)
नारकण्डा से पहले हाटू चोटी जायेंगे। फिर वहां से नीचे उतरकर सतलुज नदी पार करेंगे और जलोडी जोत की चढाई आरम्भ कर देंगे। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 3100 मीटर है। इसके पास सेरोलसर झील है। झील तक जाने के लिये 4 किलोमीटर की आसान ट्रैकिंग है। इसके अलावा थोडी ही दूरी पर रघुपुर किला और रघुपुर मैदान है। ऊंचे पहाडों में हरी घास के ये विशाल मैदान मनमोहक होते हैं। जलोडी जोत से थोडा आगे शोजा में या फिर बंजार में रुकेंगे।

तीसरा दिन- 23 नवम्बर- सोमवार (जलोडी जोत से ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, 30 किमी)
आज हम सबसे पहले ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में बसे गांव गुशैणी जायेंगे। आसपास का भ्रमण करेंगे और रात्रि विश्राम गुशैणी में ही करेंगे। या फिर हो सकता है कि बंजार में ही रुके रहें। बंजार और गुशैणी ज्यादा दूर भी नहीं हैं।

चौथा दिन- 24 नवम्बर- मंगलवार (गुशैणी से पराशर झील, 95 किमी)
तीर्थन घाटी हिमाचल की खूबसूरत घाटियों में से एक है। गुशैणी से ही हम तीर्थन नदी के साथ-साथ रहेंगे जो आगे लारजी में ब्यास नदी में मिल जाती है। शाम तक पराशर झील पहुंचेंगे। यहां एक पंगा है। ठहरने के दो ही विकल्प हैं- जंगल विभाग का रेस्ट हाउस और मन्दिर की धर्मशाला। सरकारी रेस्ट हाउस की पहले से बुकिंग मैंने कभी नहीं की है और मुझे इनकी बुकिंग करना टेढी खीर लगता है। मन्दिर की धर्मशाला में गद्दे और कम्बल मिलेंगे जहां हमारे कुछ साथी रुकना पसन्द नहीं करेंगे। इसलिये हो सकता है कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क या तीर्थन घाटी में थोडा और ज्यादा समय लगाकर शाम तक हम ब्यास घाटी में आ जायें और मेन रोड पर किसी होटल में रुक जायें।

पांचवां दिन- 25 नवम्बर- बुधवार (पराशर झील से तुंगा माता)
आज हम पराशर झील के आसपास भ्रमण करेंगे। करीब पांच किलोमीटर का आसान ट्रैक करके घने जंगल में बने तुंगा माता मन्दिर तक जायेंगे। शाम को यहां से वापस चल देंगे और सुबह-सवेरे तक दिल्ली पहुंच जायेंगे। पराशर झील से दिल्ली करीब 500 किमी है।

यह तो हुआ एण्टी-क्लोकवाइज कार्यक्रम। अब बात करते हैं क्लोकवाइज की:

पहला दिन- 21 नवम्बर- शनिवार (दिल्ली से रिवालसर झील)
दिल्ली से चलकर रिवालसर पहुंचने में शाम हो ही जानी है। ऊना, भोटा के रास्ते जायेंगे क्योंकि वह मुख्य रास्ते के मुकाबले बेहद शानदार बना है।

दूसरा दिन- 22 नवम्बर- रविवार (रिवालसर से पराशर झील)
पराशर झील पर ठहरने के बारे में यहां भी वही बात पडेगी। लेकिन चूंकि मण्डी आज हमारे रास्ते में पडेगा तो जिला जंगल अधिकारी से मिलने में कोई आपत्ति नहीं होगी। पराशर रेस्ट हाउस में रुकना मिल गया तो ठीक, नहीं तो पूरे दिन पराशर और तुंगा माता देखकर शाम को ब्यास घाटी में बजौरा या औट में रुक जायेंगे। ब्यास घाटी में रुकने की कोई कमी नहीं है।

तीसरा दिन- 23 नवम्बर- सोमवार (ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क)
आज तीर्थन घाटी और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क देखते हुए शाम को बंजार या गुशैणी रुकेंगे।

चौथा दिन- 24 नवम्बर- मंगलवार (जलोडी जोत, सेरोलसर झील, रघुपुर)
आज का पूरा दिन जलोडी जोत के नाम रहेगा। शोजा में रात रुका जा सकता है। जलोडी जोत के दूसरी तरफ आनी में मेरी जानकारी में कोई अच्छा होटल नहीं है।

पांचवां दिन- 25 नवम्बर- बुधवार (नारकण्डा, हाटू चोटी)
आज सतलुज दर्शन करेंगे, फिर नारकण्डा और हाटू चोटी पहुंचेंगे। वहां से फिर दिल्ली तक शानदार सडक बनी है।

इस तरह दोनों तरह से कार्यक्रम बनाया जा सकता है। अभी यात्रा में लगभग एक महीना बाकी है। कितने लोग यात्रा पर जाना चाहते हैं, इसे देखते हुए ही सारी बातें तय की जायेंगी। फिर मित्रों की रुचियां भी अपनी जगह हैं। मेरी पसन्द क्लोकवाइज जाने की है। जो जो मित्र रजिस्ट्रेशन करते जायेंगे, उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोडा जायेगा जहां नियमित इसी की चर्चा होती रहेगी। रात रुकने के बारे में हो सकता है कि आपको भ्रम की स्थिति लगे लेकिन यकीन मानिये कि जहां भी हम रुकेंगे, वो जगह आपको पसन्द आयेगी।
   अब बात करते हैं खर्चे की। इसका खर्च निर्धारित किया गया है 10000 रुपये। दिल्ली से दिल्ली तक आना-जाना, रात रुकना और खाना-पीना। मदिरापान प्रतिबन्धित रहेगा। हालांकि बहुत से लोगों के लिये घूमने का अर्थ मदिरापान ही होता है। मैं ऐसे लोगों को साथ नहीं ले जाना चाहता। मदिरापान करते समय और उसके बाद उन्हें कोई मतलब नहीं होता कि वे कहां हैं और किससे कैसी बातें करनी हैं। घूमने का अर्थ घूमना हो बस।
   हालांकि मांसभक्षण पर भी प्रतिबन्ध लगाया गया है। मुझे व्यक्तिगत रूप से किसी के मांसभक्षण करने पर कोई आपत्ति नहीं है लेकिन समूह के शाकाहारी सदस्यों को आपत्ति हो सकती है, इसलिये यह प्रतिबन्ध लगाया है।
   कुछ मित्रों के लिये दस हजार रुपये इस पांच दिवसीय यात्रा के लिये काफी कम हैं, कुछ के लिये ठीक हैं और कुछ के लिये ज्यादा भी हैं। वैसे सच बताऊं तो यह यात्रा दस हजार से कम में भी की जा सकती है। लेकिन जब आप किसी समूह को लेकर जा रहे हैं तो कई बातें ध्यान में रखनी होती हैं। एक अकेला आदमी आनी की उस टूटी-फूटी ‘डोरमेट्री’ में रुक सकता है या पराशर में मन्दिर की धर्मशाला में रुक सकता है लेकिन एक समूह नहीं रुक सकता। समूह में हर तरह के लोग होते हैं और सभी की रुचियों का औसत निकालना होता है। यह औसत कुछ के लिये महंगा होता है और कुछ के लिये सस्ता।

कुछ बातें और
1. यात्रा का उच्चतम बिन्दु हाटू चोटी (3200 मीटर) है। इसके अलावा जलोडी जोत (3100 मीटर) और पराशर झील (2600 मीटर) भी काफी ऊंचाई पर स्थित हैं। नवम्बर के आखिरी सप्ताह में यहां तापमान शून्य डिग्री के आसपास रहता है। यहां तक कि शून्य से नीचे भी पहुंच जाता है। इसलिये सर्दी से बचने का पूरा इंतजाम करके आयें। मोटी जुराबें, दस्तानें और मंकी कैप बहुत काम आते हैं। गर्म लोवर, गर्म इनर, जैकेट और काला चश्मा अवश्य साथ लायें।
2. इन दिनों अक्सर बर्फबारी शुरू नहीं होती है, इसलिये ताजी बर्फ नहीं मिलेगी। दूर-दराज के पर्वतों पर बर्फ दिखेगी लेकिन आपको बर्फ में खेलने का मौका नहीं मिलेगा। लेकिन अगर मौसम खराब हो गया तो हाटू या जलोडी जोत पर बर्फबारी मिल सकती है।
3. रात्रि विश्राम के लिये प्राथमिकता होटल में रुकने की होगी लेकिन यदि आप टैंट में रात बिताना चाहते हैं तो उसका भी प्रबन्ध होगा। इसके लिये आपको कम से कम एक दिन पहले सूचित करना होगा। टैंट सीमित संख्या में हैं, इसलिये ‘पहले आओ, पहले पाओ’ वाला नियम लागू होगा। टैंट-स्लीपिंग बैग में रुकने का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं है। लेकिन यदि आपने टैंट में रुकने की सहमति दी है तो आपके लिये उस दिन कोई कमरा आरक्षित नहीं किया जायेगा। टैंट वही होंगे जो मेरे पास हैं। इनमें नीचे मैट्रेस बिछाई जायेगी और यह दो लोगों के लिये ही होता है।
किसी भी होटल की बुकिंग पहले से नहीं होगी। जहां भी रुकेंगे, वहां पहुंचकर ही होटल बुक करेंगे। इसलिये हो सकता है कि एक जगह बात न बने तो थोडा और आगे चलना पडे। इससे निराश और परेशान मत होना।
4. दिल्ली से दिल्ली तक इन पांच दिनों का शुल्क निर्धारित किया गया है- 10000 रुपये प्रति व्यक्ति। इसमें नाश्ता, लंच, डिनर शामिल हैं। चार रात रुकने का खर्च शामिल है। विभिन्न तरह के परमिट आदि शामिल हैं। और आना-जाना तो शामिल है ही। अपने घर से दिल्ली, शास्त्री पार्क तक आपको स्वयं के खर्च से आना और जाना पडेगा।
लेकिन इसमें आपकी निजी शॉपिंग शामिल नहीं है। मांसाहार और मदिरापान प्रतिबन्धित हैं।
5. आप इस यात्रा पर अपने मित्रों के साथ या सपरिवार भी चल सकते हैं। 12 वर्ष से कम आयु और 3 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों का शुल्क 5000 रुपये है। 3 वर्ष से कम आयु के बच्चों का कोई शुल्क नहीं है। लेकिन ध्यान रहे, ठण्ड अच्छी-खासी मिलेगी।
6. कम ऑक्सीजन की समस्या नहीं आयेगी। यदि कुछ महसूस हुआ भी तो वो जलोडी जोत पर सेरोलसर जाते समय महसूस हो सकता है। फिर उससे पहले हम नारकण्डा रुकेंगे जो 2600 मीटर पर स्थित है। इसलिये जलोडी जोत पर कोई दिक्कत नहीं आने वाली।
7. यात्रा-कार्यक्रम परिवर्तनीय है। मौसम या किसी अन्य कारक की वजह से यात्रा-कार्यक्रम में परिवर्तन हो सकता है। लेकिन इतना निश्चित है कि निर्धारित समय पर ही दिल्ली पहुंचेंगे। और निर्धारित समय है अधिक से अधिक 26 नवम्बर की सुबह छह बजे।
8. प्रत्येक दिन की समाप्ति पर आपको उस दिन के अनुभवों पर आधारित एक लघु लेख लिखना है। इसे बाद में ‘मुसाफिर हूं यारों’ पर प्रकाशित किया जायेगा। यात्रा-समाप्ति पर एक फोटो प्रतियोगिता भी आयोजित की जायेगी। इसके विजेता को आकर्षक पुरस्कार दिया जायेगा। (हालांकि अभी भी सोच रहा हूं कि क्या पुरस्कार दूं। खैर)
9. यह बजट चार या उससे अधिक यात्रियों के आधार पर बनाया गया है। यदि इससे कम यात्री रजिस्ट्रेशन कराते हैं तो उनकी पूरी राशि लौटा दी जायेगी और तब हम एक साथ अपने-अपने खर्चे पर सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करेंगे। सम्भव हुआ तो बाइक यात्रा भी कर सकते हैं।
10. यदि किसी वजह से आप अपना रजिस्ट्रेशन रद्द कराना चाहते हैं तो उसकी एक ही शर्त है कि आपको 15 नवम्बर तक कराना होगा। 15 नवम्बर तक रजिस्ट्रेशन रद्द कराने पर आपको पूरी राशि वापस मिल जायेगी। यदि आप 16 से 20 नवम्बर के बीच रजिस्ट्रेशन रद्द कराते हैं तो आधी राशि ही वापस मिलेगी। और 21 नवम्बर यानी यात्रा शुरू होने के बाद अगर आप मना करते हैं तो कोई राशि वापस नहीं मिलेगी। आपके सारे पैसे मैं डकार जाऊंगा।
11. यात्रा में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। अपने रजिस्ट्रेशन के लिये आपको पूरी राशि एडवांस जमा करनी होगी। इसके लिये मेरे बैंक खाते की जानकारियां निम्न प्रकार हैं:

Neeraj Kumar
A/C No. 307302010593246 (Union Bank of India, Khari Baoli, Delhi)
IFSC Code: UBIN0530735

निर्धारित राशि 15 नवम्बर तक जमा करा दें ताकि मुझे आगे का प्रबन्ध करने में सुविधा हो। राशि जमा करने की सूचना मेरे फेसबुक पेज या 9650270044 पर व्हाट्सएप से अवश्य दें। neerajjaatji@gmail.com पर ई-मेल भी कर सकते हैं और नीचे कमेण्ट भी कर सकते हैं।




21 comments:

  1. Congratulation Neeraj bhai . Jab aapna shokh aapna vyavasay ban jata he to bahut maja aatata he . Bhavishya me aapke sath yatra karna pasand karunga .

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    1. धन्यवाद उमेश भाई...

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  2. Best of luck neeraj bhaiya, aakhir kar aap team leader bn he gye.....!! :-) subh time se uth jana ab..... :-P

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    1. हा हा हा... सही कहा...

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  3. आपके नवीन व् सच्चे प्रयोग के लिए हार्दिक शुभकामनायें । आपके नेतृत्व में सभी पर्यटक बनकर घुमक्कड़ी का आनंद लेंगे और घूमना भी जानकारी से पूर्ण होगा ।

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. Neeraj , First post doesn't mean necessarily the first time reader (I know this doesn’t sound good but fact is fact , at least in my case ::) ) . I have been following you since years but I am letting you know the first time , see I am a fan in conceal ,true follower .
    I have a kind of desire buried somewhere in my heart to chase my dream , do what I like to do but probably I am lacking courage so delaying the action .
    Un till now you been an adventurous traveler for me who likes to explore the world and share as well but now I see your different part of personality who has guts and courage - A MAN . Now you are kind of one of the source of inspiration for me , and believe you me - I mean it .
    The decision which I have been procrastinating since early 2014 , now may hit the ground by early 2016 . I will owe you buddy for direct or indirect influence .
    Manish

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  6. ये हुई ना बात...........
    शुभकामनायें

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    1. धन्यवाद अमित भाई.

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  7. शुभकामनाये , निरज😊

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    1. धन्यवाद सोलंकी साहब...

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  8. This comment has been removed by the author.

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  9. बहुत से लोगों के लिए घुमने का अर्थ मदिरापान ????

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  10. Wishing you all the success brother; I would love to travel with you sometime.

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  11. वाह! और एक पहल! हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  12. नीरज भाई ,
    हार्दिक शुभकामनाएँ!
    मे तो जबसे आपके post पढ राहा हु तबसे चाहथा था कि आप यात्रा आयोजन करे … आपका यात्रा अनुभव काम आये ओर आप कुछ राशी कमाये …
    लेकिन आपको अच्छा लगेगा या नाही …ये सोच कर मेने कभी आपको बोल नाही paya …

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  13. AAPKA BLOG BHOT HI ACHA HGHE MAIN BHETHE -2 I BHART KE DARSHAN HO GYE

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