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Wednesday, March 26, 2014

मिज़ोरम साइकिल यात्रा- तुईवॉल से खावजॉल

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27 जनवरी, 2014
हम तुईवॉल नदी के किनारे बने एक मन्दिर में टैंट लगा कर रात रुके थे। साढे सात बजे सोकर उठे। बाहर झांककर देखा तो अदभुत नजारा दिखा। नीचे नदी घाटी में बादल थे जबकि ऊपर बादल नहीं थे। पहाडियों का ऊपरी हिस्सा आसमान में तैरता सा दिख रहा था। मुझे लगा कि यह नजारा अभी कुछ देर तक बना रहेगा। लेकिन जब तक टैंट उखाडा, तब तक सभी बादल हट चुके थे। जैसे जैसे नीचे घाटी में धूप पसरती जा रही थी, बादल भी समाप्त होते जा रहे थे।
मुझे नहाये हुए चार दिन हो चुके थे। कभी सिल्चर में ही नहाया था। सचिन को भी तीन दिन हो चुके थे। जहां मुझे सर्दी बिल्कुल नहीं लग रही थी, वही सचिन ठण्ड से कांप रहा था। सचिन ठहरा मुम्बई वाला। वहां बस दो ही मौसम होते हैं- गर्मी और बरसात। ठण्ड का उन्हें तब पता चलता है जब वे मुम्बई छोडकर उत्तर की ओर बढते हैं। जबकि मैं था दिल्लीवाला। हम जहां भयंकर गर्मी झेलते हैं, वहीं कडाके की ठण्ड भी झेलनी होती है। इसलिये मेरे लिये मिज़ोरम का यह मौसम खुशनुमा था। फिर भी नहाने की इच्छा उसकी भी थी।

Thursday, March 20, 2014

मिज़ोरम साइकिल यात्रा- तमदिल झील

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26 जनवरी 2014 यानी गणतन्त्र दिवस...
इसी दिन के मद्देनजर हमने मिज़ोरम यात्रा का कार्यक्रम बनाया था। इच्छा थी यह देखने की कि देश की मुख्यधारा से सैंकडों किलोमीटर दूर मिज़ोरम में गणतन्त्र दिवस पर क्या होता है। होने को यहां हमें तिरंगे के दर्शन की भी उम्मीद नहीं थी क्योंकि इस बार गणतन्त्र दिवस रविवार को था। रविवार को मुख्यभूमि पर भी कोई उल्लास नहीं होता। देश की राजधानी के आस-पास भी कोई रविवार को स्कूल या कार्यालय नहीं जाना चाहता। खूब देखा है कि ऐसे में ज्यादातर तो गणतन्त्र दिवस एक दिन पहले मना लिया जाता है, कभी-कभार अगले दिन भी मनाया जाता है। हम स्वयं भी रविवार को स्कूल जाना पसन्द नहीं करते थे।
फिर मिज़ोरम ईसाई प्रधान है। यहां रविवार का दूसरा ही अर्थ है। रविवार अर्थात पूर्ण छुट्टी, पूर्ण बन्दी। यह धार्मिक दिन है और इस दिन सभी लोग चर्च जाते हैं। इसलिये मुझे मिज़ोरम में तिरंगा दिखने की कोई उम्मीद नहीं थी। तीसरी बात, हमारे आसपास कोई बडा शहर नहीं था। बडा क्या, छोटा भी नहीं था। आठ किलोमीटर आगे कीफांग गांव है। गांव में क्या गणतन्त्र दिवस दिखने की कोई उम्मीद है?

Wednesday, March 5, 2014

मिज़ोरम साइकिल यात्रा- आइजॉल से कीफांग

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25 जनवरी 2014 की सुबह थी और हम थे मिज़ोरम की राजधानी आइजॉल में। आज हमें साइकिल यात्रा आरम्भ कर देनी थी और हमारा आज का लक्ष्य था 75 किलोमीटर दूर सैतुअल में रुकने का। दूरी-ऊंचाई मानचित्र के अनुसार हमें आइजॉल (1100 मीटर) से 20 किलोमीटर दूर तुईरियाल (200 मीटर) तक नीचे उतरना था, फिर सेलिंग (800 मीटर) तक ऊपर, फिर 300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित और 15 किलोमीटर दूर एक पुल तक नीचे व आखिर में कीफांग (1100 मीटर) तक 20 किलोमीटर की चढाई पर साइकिल चलानी थी। कीफांग से सैतुअल 3 किलोमीटर आगे है। सैतुअल में टूरिस्ट लॉज है जहां हमारी रुकने की योजना है।
अच्छी तरह पेट भरकर और काफी मात्रा में बिस्कुट आदि लेकर हम चल पडे। हम रात को जिस होटल में रुके थे, वह आइजॉल से बाहर एयरपोर्ट रोड पर था। वैसे तो हमें राजधानी भी देखनी चाहिये थी लेकिन मिज़ो जनजीवन को देखने का सर्वोत्तम तरीका गांवों का भ्रमण ही है। साइकिल यात्रा में हम जमकर ग्राम्य भ्रमण करने वाले हैं।