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Thursday, July 19, 2012

ट्रेन से भारत परिक्रमा

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इस बार बडा ही धाकड प्रोग्राम बनाया है। अक्सर मेरी सोच ज्यादा लम्बी नहीं चलती, बस एक महीने आगे की ही सोच सकता हूं। जून का महीना जब चल रहा था, तो मेरी सोच मात्र जुलाई तक ही सीमित थी, अगस्त के बारे में कि कहां जाना है, मैं सोच भी नहीं सकता था। लेकिन अब जमाना बदल गया है। हमने भी लम्बा-लम्बा सोचना शुरू कर दिया है। उसी का नतीजा है यह धाकड प्रोग्राम।
जून में जब मैं गौमुख गया था तो लगातार कई कई दिन चलते रहने से, दुनिया से कटे रहने से, थके रहने से, कुछ भी ना करने से दिमाग या तो बाहरी दुनिया के बारे से सोचने की मना कर देता है, या फिर कुछ स्पेशल सोचता है। हमारे दिमाग ने स्पेशल सोचा। मतलब यह है कि ट्रेन यात्रा का यह प्रोग्राम गंगाजी की देन है। वहीं ट्रेकिंग करते करते अपने दिमाग में आया कि एक लम्बी ट्रेन यात्रा की जाये। वहीं समय भी तय हो गया कि अगस्त में चलेंगे। क्योंकि अगस्त तक प्रायः मानसून पूरे भारत पर कब्जा जमा लेता है और धरती का रंग रूप बदल जाता है। साथ ही मौसम की चुभन भी कम हो जाती है।
वापस आकर इस दिशा में काम शुरू कर दिया। यह इतना आसान नहीं था। खूब दिमाग की खिचडी बनाई और तब जाकर फाइनल हुआ कि ट्रेन से भारत की परिक्रमा करेंगे। वैसे तो परिक्रमा ही खुद में खास होती है लेकिन परिक्रमा में भी कुछ खास होना चाहिये। सबसे पूर्वी स्टेशन असोम में लेडो जोकि तिनसुकिया जिले में अरुणाचल सीमा के पास है, सबसे दक्षिणी स्टेशन कन्याकुमारी, सबसे पश्चिमी स्टेशन भुज* और सबसे उत्तरी स्टेशन ऊधमपुर* को चुना गया- कश्मीर रेलवे को छोड दिया जाये तो ऊधमपुर ही सबसे उत्तरी स्टेशन है।। साथ ही डिब्रुगढ से कन्याकुमारी तक सप्ताह में एक बार चलने वाली विवेक एक्सप्रेस से यात्रा करना भी था। विवेक एक्सप्रेस भारत की सबसे लम्बी दूरी तय करने वाली ट्रेन है। पहले यह दर्जा जम्मू तवी से कन्याकुमारी तक जाने वाली हिमसागर एक्सप्रेस के पास था। विवेक एक्सप्रेस 4273 किलोमीटर का सफर तय करती है जो हिमसागर से लगभग 500 किलोमीटर ज्यादा है।
अब बारी थी कि क्लोकवाइज घूमा जाये या एण्टीक्लोकवाइज। दिल्ली से चलकर पहले असोम जाया जाये या ऊधमपुर। दोनों कार्यक्रम बनाये गये। ट्रेनें भी छांटी गई। यही काम सबसे मुश्किल काम था। लम्बी दूरी की ट्रेनें अक्सर साप्ताहिक होती हैं। ऊपर से विवेक एक्सप्रेस भी साप्ताहिक, इसलिये विवेक के हिसाब से कार्यक्रम बना। डिब्रुगढ से यह ट्रेन हर शनिवार को चलती है, तो दिल्ली से मुझे इस हिसाब से निकलना था कि शनिवार तक मैं डिब्रुगढ पहुंच जाऊं।
खैर, सबकुछ सोच विचारकर, जांच परखकर तय हुआ कि क्लोकवाइज चलते हैं। रूट इस प्रकार बना: आनन्द विहार- गुवाहाटी- लेडो- डिब्रुगढ- कन्याकुमारी- त्रिवेन्द्रम- मुम्बई- भुज- अहमदाबाद- ऊधमपुर- दिल्ली। हर ट्रेन के बीच में पर्याप्त गैप रखा गया ताकि एक के लेट होने पर दूसरी ट्रेन छूट ना जाये। किसी स्थान विशेष के दर्शनीय स्थानों को नहीं देखना तय हुआ। इतना होने के बाद रिजर्वेशन करा लिया गया और चैन की सांस लेने लगा।
लेकिन चैन की सांस लेना इतना आसान होता तो यह इतनी दुर्लभ चीज ना होती। मेरे पास हर राज्य का रोड मैप है। इसमें उस राज्य के हर जिले का नक्शा पूरे पेज का है। एक दिन मैं गुजरात को खोल बैठा और यही से चैन की सांस छिन गई। हुआ ये कि मैं अभी तक भुज को भारत का सबसे पश्चिमी स्टेशन मान रहा था। वैसे तो भुज से भी आगे पश्चिम में नलिया तक रेल लाइन है लेकिन उस पर आजकल पैसेंजर ट्रेनें नहीं चलतीं, बस मिलिट्री की मालगाडियां ही चलती हैं, इसलिये नलिया को इस पश्चिमी उपलब्धि से दूर कर दिया गया।
हां तो, मैं कह रहा था कि पूरे गुजरात का नक्शा देख रहा था कि तभी ओखा दिख पडा और सिद्ध हो गया कि ओखा भुज के मुकाबले ज्यादा पश्चिम में है। तभी से मेरी चैन छिन गई। तुरन्त ओखा जाने की योजना बनने लगी। खैर, ओखा तक तो पहुंच गया लेकिन अगले दिन सुबह वापस अहमदाबाद लौटना असम्भव हो गया। फिर तो और भी ज्यादा जोर शोर से इस काम में लग गया और आखिरकार मैं इस काम में सफल भी हो गया। असल में अहमदाबाद से ऊधमपुर तक मुझे जन्मभूमि एक्सप्रेस से जाना था जो अहमदाबाद से रविवार की सुबह आठ बजे चलती है। मुम्बई- भुज और भुज- अहमदाबाद के टिकट रद्द कराये और इसके स्थान पर मुम्बई- अहमदाबाद गरीब रथ से, अहमदाबाद- राजकोट सोमनाथ एक्सप्रेस से, राजकोट-ओखा भावनगर पैसेंजर से, ओखा- हापा वापस उसी भावनगर पैसेंजर से और आखिर में हापा से अहमदाबाद तिरुनेलवेली एक्सप्रेस से कराये गये। इनमें राजकोट-ओखा-हापा पैसेंजर ट्रेन से जाऊंगा और कोई रिजर्वेशन नहीं, यानी जनरल डिब्बे में।
अगर कोई इस पोस्ट को दिलचस्पी से पढ रहा होगा तो सोच रहा होगा कि चूंकि ओखा भुज के मुकाबले ज्यादा पश्चिम में है, इसलिये अहमदाबाद से ओखा की दूरी भी ज्यादा ही होगी। फिर ओखा रूट पर कई सौ किलोमीटर पैसेंजर ट्रेन से जाना होगा। यानी मुम्बई- भुज- अहमदाबाद के स्थान पर मुम्बई- ओखा- अहमदाबाद पर इन ट्रेनों में कम से कम बारह घण्टे ज्यादा लगेंगे। वो टाइम कहां से आयेगा। बताता हूं।
शुरू में जो योजना बनी थी, उसके अनुसार मुझे त्रिवेन्द्रम से सीधे मुम्बई आना था नेत्रावती एक्सप्रेस से जो शाम साढे छह बजे मुम्बई आती है। उसके बाद रात बारह बजे दादर- भुज पकडनी थी। नेत्रावती त्रिवेन्द्रम से सुबह साढे नौ बजे चलती है जबकि मैं कन्याकुमारी पहले दिन सुबह दस बजे पहुंच जाता। यानी लगभग चौबीस घण्टे मुझे कन्याकुमारी त्रिवेन्द्रम में ही रहना था। इन चौबीस घण्टों को कम कर दिया गया और त्रिवेन्द्रम- मुम्बई यात्रा को दो भागों में बांट दिया गया- त्रिवेन्द्रम- मंगलौर और मंगलौर- मुम्बई।

ताजा अपडेट: अपने एक फेसबुक दोस्त हैं- शेखर सुमन। उन्होंने हाल ही में चेतावनी दी कि नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस से अगर जाना है तो अगली ट्रेन के लिये मार्जिन तीन घण्टे लेना खतरनाक हो सकता है। उनकी इस चेतावनी पर मैंने गौर किया तो देखा कि आज (20 जुलाई) यह ट्रेन चार घण्टे लेट चल रही है। उधर असोम में बाढ भी एक बडी दिक्कत है। इसलिये नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस को अपनी लिस्ट से हटा दिया। इसकी बजाय अब पूर्वोत्तर सम्पर्क क्रान्ति को चुना गया है। इससे मार्जिन भी तीन घण्टे से बढकर 12 घण्टे हो गया है। अब यात्रा 9 अगस्त की सुबह के बजाय 8 अगस्त की रात को ही शुरू हो जायेगी। बाकी सभी ट्रेनों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

खैर, कुछ भी हो, अब सारी योजना बन चुकी है और आठ अगस्त की रात को मैं दिल्ली से निकल पडूंगा। सारे रिजर्वेशन हो चुके हैं। सब ट्रेनों में स्लीपर में सैकडों सीटें खाली पडी थीं, इसलिये अपनी मनपसन्द सीट यानी ऊपर वाली बर्थ मिल गई।

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20 comments:

  1. बहुत अच्छा कार्यक्रम बनाया हैं नीरज जी, पुरे भारत के हर क्षेत्र की संस्कृति और रंग देखने को मिलेगा. भगवान आपकी यात्रा सफल करे. दुआओं के साथ, वन्देमातरम.

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  2. बहुत खूब! यात्रा की मंगलकामनायें।

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  3. वाह आपकी यात्रा सुखद हो, और हमें कई रोमांचकारी अनुभव पढ़ने को मिलेंगे।

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  4. Best of luck for your journey.
    Hope I will meet you in Mumbai if you have time.

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  5. जोलारपेट से बंगलोर आईये, वहाँ से आगे की यात्रा यथावत रहेगी, सेलम होते हुये भेज देंगे।

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  6. वाह! ये हुई असली यात्रा. बिन मांगे सलाह दे रहा हूं - साथ में एक लैपटाप रख लें और रिलायंस इंडिया सीडीएमए का वायरलेस मॉडम - (इसकी पैन इंडिया कनेक्टिविटी बेहतर है). फिर सारी यात्रा में बीच बीच में लिखते रहें, चित्र लेते रहें और पोस्ट करते रहें. हम जैसे आपके पाठक साथ में यात्रा कर लेंगे.

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  7. आपकी यात्रा मंगलमय हो.

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  8. नीरज जी .....अहोभाग्य हमारे ....आप हमारे यहाँ पधारे ........20 अगस्त को आपकी गाडी हमारे घर के सामने से गुजरेगी .....जी हाँ अहमदाबाद जम्मूतवी exp .........लगभग 11 बजे सुल्तानपुर लोधी आयेगा .....जो की गुरु नानक देव जी से जुड़ा एक अत्यंत पवित्र एवं ऐतिहासिक नगर है ..........यहाँ मेरी पत्नी एक विद्यालय की प्रिंसिपल है और स्वयं एक adventure loving जीव है .....हाल ही में मेरी बेटी के साथ 26 दिन का basic mountaineering course मनाली में कर के आयी है ..........उस दिन हम आपको स्टेशन पे मिलेंगे .......गरमा गर्म भोजन के साथ ...........और संभव हुआ तो कुछ घंटे उसी ट्रेन में आपके साथ बिताएंगे ............. यदि कुछ स्पेशल खाना हो तो बता देना ..........आपके फोन से संपर्क में रहूँगा २० अगस्त को कृपया किसी अन्य का आतिथ्य स्वीकार न करें
    अजित एवं मोनिका
    ph no 09592110701
    09914439209

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    1. नहीं जी, मैं 19107 जन्मभूमि एक्स से निकलूंगा। यह ट्रेन सुल्तानपुर लोधी नहीं रुकती, फिरोजपुर से सीधी जालंधर जाकर रुकती है।

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    2. नीरज भाई बहुत खुब. भारत दर्शन. एक बात कहना चाहूँगा, ट्रेन के साथ बस भी पर्योग कर सकते हैं. ट्रेन कभी लेट हो , तो बस से अगले स्टेशन जा सकते हैं. वैसे गुजरात में बस सिस्टम बहुत अच्छा है, अगर आप चाहते तो भुज से ओखा बस में जा सकते थे. अपना id कार्ड साथ रखना, और बता देना उस पर आपका नाम कैसे स्पेल किया गया है. अजीत भाई ने खाने के लिए बोला था, आप ने टक्का सा जवाब लिख दिया ट्रेन सुल्तानपुर लोधी नहीं रूकती. पर जालंधर में तो रूकती है. आप की जानकारी के लिए अंग्रेजो के ज़माने में पंजा साहिब के लोगों ने देश भक्तों को लंगर खिलाने के लिए ट्रेन पंजा साहिब में रुकवा दी थी. यात्रा में १५ रूपये वाला मिनरल वाटर ही पीना, पर्दूशत पानी से सेहत ख़राब हो जाती है. रोटी पानी का सब खर्च पंजाब की तरफ से देल्ही के हैण्डसम छोरे के लिए .

      आप की यात्रा मंगलमय हो .

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  9. आपकी यात्रा मंगलमय हो, शुभकामनाएँ!

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  10. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

    आइये पाठक गण स्वागत है ।।

    लिंक किये गए किसी भी पोस्ट की समालोचना लिखिए ।

    यह समालोचना सम्बंधित पोस्ट की लिंक पर लगा दी जाएगी 11 AM पर ।।

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  11. मनपसन्द सीट व् वाहन, घुमक्कडी जिंदाबाद

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  12. वाह बहुत बढ़िया, ये तो अच्छा ख़ासा उद्यम है, यात्रा के साथ—सा​थ आपकी पोस्टों की प्रतीक्षा रहेगी अब

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  13. वाह ! देख के ही मजा आ गया
    घूम के आओ फिर बताओ
    क्या क्या देख कर आये
    कैसा है देश और उसकी
    तबीयत आ कर बतायें !!!

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  14. वाह ... बहुत बढिया।

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  15. हमारे गांव से गुजरोगे तो फ़ोन कर देना। :)
    शुभकामनाएं

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  16. बहुत खूब! यात्रा की मंगलकामनायें।

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  17. लगे रहो.....बहुत बढ़िया प्लान हैं....|

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