ऐसा है कि दो महीने होने वाले हैं मुझे घर से बाहर निकले हुए। कभी अप्रैल के शुरू में जोशीमठ गया था, अब जून आने वाला है। जितनी भी यात्रा कथाएं थीं, सब खत्म हो गई हैं। मतलब ये बनता है कि मेरी दुकान आजकल घाटे में चल रही है। मैटीरियल नहीं बचा। पूरे दिन बिजी रहने वाला इंसान आजकल खाली है।
यही तो प्रोबलम है। खाली दिमाग शैतान का घर। नई नई खुराफातें सूझती हैं। कभी दिमाग में आता है कि ट्रेन से भारत की परिक्रमा करो, कभी हिमालय पर जा चढने का ख्याल आता है, वो भी नेपाल जाकर। आज ही एक ख्याल आया कि अपनी यात्रा कथाओं का अंग्रेजी अनुवाद किया जाये, और इसकी शुरूआत भी कर दी।
काफी दिन से मैंने वर्डप्रेस पर एक ब्लॉग बना रखा था- neerajjaatji.wordpress.com के नाम से। इसका नाम था Neerajjaatji's Blog. कारण यह था कि जो लोग नीरज जाट को गूगल में अंग्रेजी में टाइप करके ढूंढते हैं, वे उसके पास आसानी से पहुंच जायें। तो जी उनकी पहुंच को आसान बनाने के लिये उस ब्लॉग में मात्र एक पोस्ट डाली गई थी, वो भी केवल एक लाइन की-
To see my hindi blog, click here.
बस।
मतलब कोई अंग्रेज हमारे उस ब्लॉग पर भी जायेगा तो उसे जबरदस्ती हिन्दी वाले पर आना ही पडेगा। और वहां से मुझे कई हिट मिलते थे। कहां से कितने कितने हिट आ रहे हैं, इस बात पर मेरी निगाह रहती है।
तो जी, हुआ ये कि अपने उसी ब्लॉग को मैंने अंग्रेज बनाने का विचार किया है। उसमें से सबकुछ हटाकर एक नई पोस्ट भी डाल दी है- AMARNATH YATRA- DELHI TO PAHALGAM। सबकुछ हिन्दी वाला ही है, लेकिन अंग्रेजी में।
अब परेशानी की बात ये है कि मुझे अंग्रेजी नहीं आती। गूगल अनुवादक की सहायता से ज्यादातर शब्दों के अंग्रेजी अनुवाद देखे और बस लगा दिये। उधर आजकल धुन भी है कि अंग्रेज बनूंगा। पूरी रात लग गई मुझे उस छोटी सी पोस्ट का अनुवाद करने में।
तो इसका एक समाधान यह सोचा गया है कि यह काम किसी और को दे दूंगा। यह भी सोच रहा हूं कि आपको दे दूं। अगर आपमें से कोई इच्छुक है तो भईया, हो जाओ शुरू। लेकिन कुछ तौर तरीके मानने पडेंगे, तभी बात बनेगी। तौर तरीके नीचे लिख रखे हैं, जरूर पढना:
1. सबसे पहली बात यह है कि इससे आपको आर्थिक रूप से कोई फायदा नहीं होगा, मुझे भी नहीं होता। लेकिन भईया, मेहनत करोगे तो फल जरूर मिलेगा। जिस पोस्ट का भी अनुवाद आप करोगे, उसके लेखक आप माने जाओगे। मतलब आपका नाम पोस्ट के जन्मदाता के तौर पर लिखा जायेगा।
2. चूंकि वो अंग्रेज वर्डप्रेस में है, इसलिये आपको भी वर्डप्रेस में एक खाता बनाना पडेगा। जब आप खाता बना लो, तो मुझे बता देना, आगे का काम मेरा। आप कोई पोस्ट अनुवाद करोगे, या कमेंट करोगे तो आपके नाम सहित आपका मुंह भी दिखाई देगा। कुछ दिन बाद पता चलेगा कि श्री abc ने चार पोस्ट लिख दी और श्री def दस पोस्ट लिखकर शीर्ष पर चल रहे हैं।
3. आपको शुरू शुरू में contributor का दर्जा दिया जायेगा। यानी आप सीधे वर्डप्रेस में पोस्ट लिखकर वहीं पर Review के लिये डाल दोगे। बाद में मैं देखूंगा कि हां, पोस्ट तैयार हो गई है तो उसे पब्लिश कर दूंगा। कुछ दिन बाद आपका प्रमोशन कर दिया जायेगा और आपको author बना दिया जायेगा। तब आप अपनी पोस्ट खुद ही डाल सकते हो। और हां, तब मेरी पोस्टों के अनुवाद करने भी जरूरी नहीं रहेंगे, आप अपनी यात्राएं भी वहां पर खुद छाप सकते हो।
4. आप अपनी राय नीचे कमेंट करके भी दे सकते हैं, या फिर मुझे मेल कर दें। मेरी मेल आईडी है:
neerajjaatji@gmail.com
4. आप अपनी राय नीचे कमेंट करके भी दे सकते हैं, या फिर मुझे मेल कर दें। मेरी मेल आईडी है:
neerajjaatji@gmail.com
अभी तो इतना ही याद आ रहा है। जैसे जैसे और बातें याद आती चली जायेंगी, यहीं पर लिख दूंगा। धन्यवाद।

अंग्रेजों को बाँह फैलाना का विचार अच्छा है..
ReplyDeleteआउटसोर्सींग!
ReplyDeleteneeraj babu,lage rahiye.
ReplyDeleteनीरज भाई राम राम, यह अच्छा प्रयास हैं, पर अपनी भाषा हिंदी में ही लगे रहते तो अच्छा था, अंग्रेजी में तो दुनिया कर रही हैं, अपनी राष्ट्र भाषा हिंदी की सेवा करने में अलग ही मज़ा हैं. अब आगे कंहा की यात्रा करने का कार्यक्रम हैं?
ReplyDeleteजाट भाई फ्री का पढने वाले तो बहुत हैं पर मेहनत करने वाले कम मिलेंगे. दूर क्यों जाओ मैं खुद फ्री केटेगरी में हूँ. मन तो करता है की कुछ मदद करूँ पर आलस आ जाता है. एक शेर याद आया
ReplyDelete"फुर्सत तो मुझे भी थी बहुत देश के लिए,
पर पेट भर गया तो मुझे नींद आ गयी"
जाट इब अग्रेज़ी में लिखेगा...रे तेरे ऐसे कैसे दिन आ गए रे..."साला तू तो साब बन गया...साब बनके कैसा तन गया...ये ब्लॉग तेरा देखो...ये पोस्ट तेरी देखो...जैसा गोरा कोई लन्दन का..."
ReplyDeleteनीरज
Mujhe to hindi me likhane me hi alas aa raha hai.
ReplyDeleteलेखकों के खाली दिमाग में शैतान बसेगा तो कुछ रचनात्मक ही रचेगा। यात्रा नहीं, तो यात्राई ब्लॉगों पर आलेख ही सही। मतलब यात्राओं के शोध के साथ अब एक शोध और ...। खैर ... जुटे रहो। जब हम खाली होते हैं तब भी खाली नहीं होते। सदैव अच्छे विचार वहां पर शैतानियत के मज़ाक अवश्य करते हैं क्योंकि सदैव गंभीर रहना भी ठीक नहीं है। हंसी मजाक जीवन को बेहतरीन ऊर्जा प्रदान करते हैं।
ReplyDeleteवाह जे भी सही है।
ReplyDeleteहिंदी में ब्लॉग लिखने में दिक्कत आ रही है क्या करूं? शब्दों के बीच में गेप ज्यादा आ रहा है और अजीब सा हो जा रहा है ब्लागर बंधू सलाह दें .
ReplyDeleteनीरज जी इस बाबत मैने आपको एक मेल भेजा है , कृपया पढ़िए . आपके उत्तर की प्रतीक्षा करूँगा
ReplyDelete