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Friday, March 18, 2011

एक बैजनाथ उत्तराखण्ड में भी है

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
भारत में बैजनाथ और बैद्यनाथ बहुत हैं। इनमें से हिमाचल प्रदेश वाला बैजनाथ काफी प्रसिद्ध है। दिल्ली से सीधे बसें भी चलती हैं। और तो और, पठानकोट से नैरो गेज वाली कांगडा रेल भी बैजनाथ होते हुए ही जोगिन्दर नगर तक जाती है। लेकिन उस बैजनाथ के अलावा एक बैजनाथ उत्तराखण्ड के कुमाऊं में भी है। यह बागेश्वर जिले में गरुड के पास है।
कौसानी से हिमालय की ओर देखने पर बीच में एक काफी बडी घाटी दिखाई देती है। पूरी घाटी में गांव और कस्बे बसे हुए हैं। इस घाटी को कत्यूरी घाटी कहते हैं। इस कत्यूरी घाटी की राजधानी किसी जमाने में बैजनाथ थी। तब इसे कार्तिकेयपुर कहते थे।
बैजनाथ में गोमती और गरुड गंगा बहती हैं। संगम के किनारे ही सन 1150 का बना हुआ मन्दिर समूह है जिसे कत्यूरी राजाओं ने बनवाया था। यहां पत्थर के बने हुए कई मन्दिर हैं जिनमें मुख्य मन्दिर भगवान शिव का है।

बराबर में गोमती और गरुड गंगा का संगम एक छोटी सी झील का रूप ले चुका है। इसमें सुनहरी महाशीर मछलियों की भरमार है। यहां मछली पकडना प्रतिबन्धित है। यहां मछलियों को चना खिलाया जाता है। मछलियों को आटे की गोलियां डालना तो मैंने कई जगह देखा है लेकिन भुने हुए चने के दाने खिलाना केवल यहीं पर देखा है।






कौसानी से लगभग चौदह किलोमीटर आगे गरुड नामक स्थान आता है। गरुड से एक रास्ता बागेश्वर भी जाता है। एक रास्ता सीधा ग्वालदम होते हुए कर्णप्रयाग चला जाता है। कर्णप्रयाग यहां से लगभग 100 किलोमीटर दूर है। इसी कर्णप्रयाग वाली रोड पर गरुड से तीन किलोमीटर आगे बैजनाथ है। बैजनाथ में खाने-पीने से लेकर रुकने तक की सारी सुविधाएं है।

मछलियों को चना खिलाया जा रहा है।


मुख्य मन्दिर भगवान शंकर का है।








यह मेरा अपना थोबडा देखने का सबसे बढिया तरीका है। आज मुझे नहाये हुए चौथा दिन है। अतुल महाराज तो रोजाना नहाने का जुगाड कर ही लेता था लेकिन मैं कभी नहीं कर पाया। मेरे नहाने के बारे में अतुल के शब्द थे- ‘मैं तो सोचता था कि आप केवल फेंकते होंगे कि मुझे नहाये हुए इतने दिन हो गये। लेकिन आज पता चला कि आप बिल्कुल सही लिखते हैं। कैसे रह लेते हो बिना नहाये हुए?’ मैंने कहा कि पहले तो मैं महीने भर तक बिना नहाये रह लेता था लेकिन अब वो बात नहीं रही। अब तो 29 वें दिन ही खाज मारने लगती है।

22 फरवरी 2011 को दोपहर बाद तीन बजे मैं और अतुल बैजनाथ पहुंचे। तय कार्यक्रम के अनुसार हमें आज बैजनाथ में ही रुकना था। चार साढे चार बजे तक हमने मन्दिर समूह को अच्छी तरह से देखकर फोटू-फाटू खींच लिये। अब मैंने कहा कि चलो कहीं कमरा देखते हैं। तभी अतुल ने ऐसा सुझाव दिया जिसकी मैं कल्पना ही नहीं कर सकता था। उसने कहा कि अभी चार बजे हैं, यहां से वापस चलते हैं। जहां तक हो सकेगा, जायेंगे। कल हमारा यहां आखिरी दिन है, शाम को साढे आठ बजे काठगोदाम से दिल्ली जाने वाली रानीखेत एक्सप्रेस पकडनी है। इसलिये अगर आज हम बचे हुए समय में वापसी की राह पकडते हैं तो कल हम अल्मोडा या किसी और जगह ज्यादा घूम सकेंगे और समय पर काठगोदाम भी पहुंच जायेंगे। चार दिन के सफर में अतुल ने केवल यही एक सुझाव दिया जो बेहद काम का था।
पिछली बार विकास अग्रवाल ने पूछा था-
नीरज भाई फोटो तो काफी अच्छे हैं, सुना है कौसानी को फूलो की घाटी भी कहा जाता है, सोच रहे हैं इस बार गर्मियों में वहां जाने की...मगर ये बताओ कि हल्द्वानी से कितना पड़ता हैं कौसानी, और रोड कैसी है, क्योकि अपनी गाडी से ही जाऊँगा...अल्मोड़ा या कौसानी में से एक चुनना हो तो किसे चुनेंगेविकास जी, मैंने पहली बार सुना है कि कौसानी को फूलों की घाटी भी कहते हैं। रही बात गर्मियों में उधर जाने की तो मैं कौसानी को वरीयता दूंगा। अल्मोडा गर्मियों में तप जाता है और हिमालयी शहर होने के बावजूद भी काफी गर्मी होती है। कौसानी अपेक्षाकृत ऊंचाई पर बसा है इसलिये गर्मियों में जाने के लिये ज्यादा उपयुक्त है। फिर चूंकि अल्मोडा रास्ते में पडेगा तो कुछ समय वहां भी बिताया जा सकता है।
हल्द्वानी से कौसानी लगभग 110 किलोमीटर होना चाहिये क्योंकि अल्मोडा लगभग 60-70 किलोमीटर है। अपनी गाडी से पांच घण्टे मानकर चलो। सडक बढिया है। हां, एक सलाह और दूंगा। अगर अपनी गाडी से जा रहे हैं तो भीमताल-भवाली होते हुए जाना। ज्योलीकोट-भवाली से जाने में ज्यादा ट्रैफिक का सामना करना पडेगा और फालतू का जाम भी मिल सकता है। क्योंकि ज्योलीकोट नैनीताल वाले रास्ते में पडता है और छुट्टियों में नैनीताल जाने वालों की बेतहाशा भीड होती है।
अंत में, यात्रा की शुभकामनाएं। वापस आकर यात्रा के बारे में बताना मत भूलना।

अगला भाग: रानीखेत के पास भी है बिनसर महादेव

इस बैजनाथ के अलावा एक बैजनाथ हिमाचल प्रदेश में भी है जिसका विस्तृत वृत्तान्त यहां क्लिक करके पढा जा सकता है।


कुमाऊं यात्रा
1. एक यात्रा अतुल के साथ
2. यात्रा कुमाऊं के एक गांव की
3. एक कुमाऊंनी गांव- भागाद्यूनी
4. कौसानी
5. एक बैजनाथ उत्तराखण्ड में भी है
6. रानीखेत के पास भी है बिनसर महादेव
7. अल्मोडा यात्रा की कुछ और यादें

24 comments:

  1. मस्त रस्वीरें...२९ दिन का बिना नहाये रियाज बचा, बस्स!!!

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  2. ये तो मैने भी देखा हुया है। बहुत सुन्दर। होली की सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें।

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  3. बिना नहाये रहने के लिये शरीर को बहुत मनाना पड़ता है।

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  4. neeraj ji, aap aaj ke yug ke Rahul Sankritayan ho... Gwaldam ke paas hi ek sthan hai jaha par barf mein dabe hue kuch shareer mile hai jinki lambai 9 feet hai wahi paas mein phoolo ki ghati bhi hai. Aur kausani ke paas ek jagah Chaukodi bhi hai jo ek sunder picnic spot hai, almora ke paas Binsar aur Jageswar bhi dekhne layak jagah hai.

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  5. तो दो ही दिन में अतुल भी सीख गया घुमक्कडी कैसे की जाती है। वाह!

    और 29वें दिन गीले तौलिये से शरीर पौंछ लेना चाहिये 15दिन और निकल जायेंगें और खाज से भी पीछा छूट जायेगा :)

    जै राम जी की

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  6. नीरज भाई, बहुत बहुत धन्यवाद आपके सुझाव के लिए, यात्रा वृतांत बिलकुल होगा वापस आने के बाद, आपको विवाह मूवी याद हो तो, उसमें एक गाना था..मुझे हक है..उसकी शूटिंग यहीं हुई थी..में भवाली से आगे एक मंदिर है...बाबा नीम करोली महाराज का...वहां तक जा चूका हूँ,,,अल्मोड़ा और रानीखेत दोनों जगह ही नहीं जा पाया अभ...यहाँ तक कि मेरा ऑफिस जिम कॉर्बेट की जड़ में है फिर भी आज तक वहां के लिए टाइम नहीं निकाल पाया...यहाँ रामनगर में एक दो जगह हैं पास में वहीँ का प्रोग्राम बन जाता है सन्डे में...गर्जिया मंदिर, कॉर्बेट फाल, सीतावनी..बस इन्ही सब जगहों में घूमना होता है ज्यादातर..

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  7. ये बैजनाथ हमने भी देखा था भाई...फोटू हमेशा की तरह जोरदार...
    होली की ढेरों शुभकामनाएं.
    नीरज

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  8. बहुत सुन्दर , आपको होली की हार्दिक शुभकामनाये !

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  9. बहुत सुन्दर , होली की ढेरों शुभकामनाएं.

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  10. आपको और आपके सारे परिवार को इस अनूठे पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

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  11. बैजनाथ मंदिर में एक ऐसा गोल पत्थर भी है जो किसी से नहीं उठता, लेकिन उंगलियों से मिलकर उठाने पर उठ जाता है।

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  12. नीरज जी
    बहुत रोचक वर्णन है ..पूरा इतिहास समेट लिया आपने अपनीं इस पोस्ट में ...आपको होली की हार्दिक शुभकामनायें

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  13. होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  14. महीने भर बिना नहाये...सही है भाई :) :) हा हा

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  15. भजन करो भोजन करो गाओ ताल तरंग।
    मन मेरो लागे रहे सब ब्लोगर के संग॥


    होलिका (अपने अंतर के कलुष) के दहन और वसन्तोसव पर्व की शुभकामनाएँ!

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  16. बहुत ही मस्त चित्र, नही नहाने का गिनीज बुक रिकार्ड तोडने के बारे में भी विचार किया जाये.:)

    होली पर्व की घणी रामराम.

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  17. नई तरह का ब्लॉग,जानकारी से भरा ,राहुल सांकृत्यायन से प्रेरित !
    होली की शुभकामनायें !

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  18. छि नीरज ,इतने दिन बिना नहाए --क्या मेरी तरह 'कव्वास्नान' भी नही ?

    अरे नीरज भाई कभी तो हंस लिया करो --:):):)

    मेरे साथ होली की दावत --मेरे ब्लोक पर ...हैप्पी होली ..

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  19. नीरज भाई आपको भी परिवार सहित होली की बहुत-बहुत मुबारकबाद... हार्दिक शुभकामनाएँ!

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  20. इस बार की पोस्ट और भी जानकारी भरी रही. होली की बधाई.

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  21. बहुत अछ्छा लगा! घूमते रहिये ऐसे ही

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  22. होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

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  23. अरे ! आप बैजनाथ से कोट के मंदिर में नहीं गए?

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  24. Bethe bethe darshan kara diye, photos sandar hai

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