Friday, December 31, 2010

जाट पहेली- 29 (कांधला)

पिछले शुक्रवार को जाट पहेली- 28 में पूछा गया था- मेरठ छावनी के बारे में।

मेरठ छावनी रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित है। यह दिल्ली से गाजियाबाद, मेरठ होते हुए सहारनपुर वाले रेल-मार्ग पर मेरठ सिटी जंक्शन से चार किलोमीटर सहारनपुर की तरफ है। इस रूट से गुजरने वाली शताब्दी, जनशताब्दी ट्रेनों को छोडकर सभी दैनिक मेल एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें यहां रुकती हैं। कुल मिलाकर यहां रुकने वाली गाडियां हैं:

एक्सप्रेस सुपर फास्ट: 18237/18238 छत्तीसगढ, 12903/12904 स्वर्ण मन्दिर, 14645/14646 शालीमार, 18477/18478 कलिंग उत्कल, 14681/14682 जालंधर, 19019/19020 देहरादून, 14511/14512 नौचंदी, 19105/19106 अहमदाबाद मेल।

पैसेंजर: 54541/54542 मेरठ सिटी-अम्बाला छावनी, 54537/54538 हजरत निजामुद्दीन-अम्बाला छावनी, 54505/54506 दिल्ली-अम्बाला छावनी, 54521/54522 दिल्ली-सहारनपुर, 54471/54472 दिल्ली-ऋषिकेश, 54411/54412 रेवाडी-मेरठ छावनी, 74001/74002 दिल्ली-मुजफ़्फ़रनगर डीएमयू, 54473/54474 दिल्ली-सहारनपुर और 54304 कालका-दिल्ली पैसेंजर।

समुद्र तल से ऊंचाई: 224.60 मीटर।

स्टेशन कोड: MUT

बाकी जानकारी प्रतियोगियों के माध्यम से:

जाट पहेली- 28 के विजेता हैं:


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100 अंक

मेरठ - सहारनपुर रेल मार्ग पर स्तिथ

सहारनपुर दिल्ली पैसेंजर/2DNS

(बिल्कुल सही उत्तर दिया है आपने। अब 2DNS को 54474 कहते हैं।)


[cc.jpg]

99 अंक

नौचंदी एक्स्प्रेस/4511

(अब नौचंदी एक्सप्रेस को 14511/14512 कहते हैं।)


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98 अंक

जालंधर एक्स्प्रेस/4681 यहाँ पर रूकती है

(अब इस गाडी का नया नम्बर 14681/14682 है।)


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97 अंक

यहाँ पर रुकने वाली ट्रेन - देहरादून एक्स्प्रेस/9020

(इस गाडी का नया नम्बर है- 19019/19020)


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96 अंक

मेरठ शहर और मेरठ केंट की दूरी मात्र चार किलोमीटर है |


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95 अंक

मेरठ छावनी स्टेशन दिल्ली- सहारनपुर-अम्बाला रेल खण्ड में स्थित है.


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94 अंक

हरिद्वार पूरी उत्कल एक्स्प्रेस/8478

(पूरी नहीं भाई, यह पुरी है। गाडी नम्बर है 18478)


[Image0584.jpg]

93-5= 88 अंक

station code- mut

15707/amrpali exp. katihar jn. to ghaziabad

(केवल स्टेशन कोड ही सही है। बाकी सभी आंकडे गलत हैं। एक बात और बता दूं, अभी इस रूट से बिहार जाने वाली एक भी गाडी नहीं है। आम्रपाली एक्सप्रेस अलीगढ के रास्ते गाजियाबाद जाती है और वहां से दिल्ली चली जाती है। यह गाडी मेरठ नहीं जाती।)

ये वे प्रतियोगी हैं जिनका उत्तर बिल्कुल सही है लेकिन इन्होंने पहेली के किसी ना किसी नियम को तोडा है। फिर भी आपको 6-6 अंक दिये जा रहे हैं।


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6 अंक

यह सटेशन १८६५ मे बन कर तेयार हो गया था, बस तभी से यहां एलो का सिल सिला ऎसा चला कि आज तक चल रहा हे, यहा से आने जाने वाली गाडी बहुत सारी हे जी, अब सही जबाब देना तो बहुत कठिन हे, क्योकि इस शहर मे बाकी पांच स्टेशन ओर भी हे, अब आप ने कहा कि स्टॆशन से बाहर नही जाना तो यहां से दिल्ली आने जाने बाली गाडिया, मेरठ शहर को आने जाने वाली गाडियां,बाकी अनंन्द विहार,साहिबावाद, मोहन नगर, गाजियावाद,गुलधर, दुहाई,मुराद नगर, मोदी नगर,दक्षिण मेरठ, शतावबदी नगर , बेगम पुर, उतर मेरठ, पुलवपुरम जेसे ओर भी बहुत से नाम हे जहां से गुजर कर रेल आती जाती हे....

अब सारी कसर निकाल दी अगली पिछली दे दे १००० ना०

(दस शब्दों की तय सीमा को आपने लांघा है।)


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6 अंक

समुद्र तल से ऊँचाई : 230 मीटर (गलत: 224.60 मीटर)

269 रेलें रूकती हैं इस स्टेशन पर (गलत: अप डाउन 33 रेलें)

मुस्सूरी एक्स्प्रेस/4041, लखनऊ मेल/2230, सरयू यमुना एक्स्प्रेस/4650, शहीद एक्स्प्रेस/4674, खुर्जा इलाहाबाद लिंक एक्स्प्रेस/4512A, हुबली पैसेंजर/311 (सभी गलत)

मेरठ अंबाला पैसेंजर/311NR, सहारनपुर दिल्ली पैसेंजर/2DNS, च्चत्तीसगर्ह एक्स्प्रेस/8238, मुज़्ज़फरनगर दिल्ली पैसेंजर/2DM, मीरूत नयी दिल्ली रेवरी पैसेंजर/2MNR, सहारनपुर दिल्ली पैसेंजर/2DS, निज़ामुद्दीन अंबाला पैसेंजर/309,309NR, शालीमार एक्स्प्रेस/4646, नौचंदी एक्स्प्रेस/4511, हरिद्वार पूरी उत्कल एक्स्प्रेस/8478, अंबाला दिल्ली पैसेंजर/306, जालंधर नयी दिल्ली एक्स्प्रेस/4682, देहरादून एक्स्प्रेस/9019, दिल्ली अंबाला पैसेंजर/305, ऋषिकेश दिल्ली पैसेंजर/372, दिल्ली सहारनपुर पैसेंजर/1DS, शालीमार एक्स्प्रेस/4645, देहरादून एक्स्प्रेस/9020, हरिद्वार अहमदाबाद मेल/9106, जालंधर एक्स्प्रेस/4681

(वैसे तो ये सभी गाडियां सही हैं लेकिन पहेली में अधिकतम शब्द सीमा 10 है, इसलिये आपको इतने अंकों से ही संतोष करना पडेगा।)

3. इंदु अरोडा


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6 अंक

मेरठ - सहारनपुर रेल मार्ग पर स्तिथ

सहारनपुर दिल्ली पैसेंजर/2DNS

(यह उत्तर आपसे पहले दिया जा चुका था। इसलिये गलत माना गया है।)

ये वे हैं जिन्होने गलत उत्तर दिया। इन्हें दिये जाते हैं 5-5 अंक:

1. pryas

मेरठ छावनी स्टेशन मेरठ में अबू लेन पर स्थित है.

(प्रयास जी, मेरठ छावनी स्टेशन अबू लेन (सही नाम आबू लेन) पर स्थित नहीं है। आबू लेन मेरठ में बेगमपुल के पास एक प्रसिद्ध बाजार है। इसकी मेरठ छावनी स्टेशन से दूरी लगभग चार किलोमीटर है।)

2. संजय भास्कर

kanpur ....dehli railmarg par hai

(गलत।)

3. निर्मला कपिला

सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई। देखा गलत बात के भी 5 अम्क तो ले ही लिये। पहेलियाँ बूझूँ कैसे कभी कहीं गयी नही । नेट के बारे मे अधिक जानकारी नही समय भी कम होता है। बस आपकी पोस्ट दुआरा ही सब कुछ जान लेंगे। आशीर्वाद।

(लो, जान लिया सबकुछ और 5 अंक भी ले लिये।

4. mrityunjay kumar rai

तस्वीर में कुछ बहादुर लोग दिखाई दे रहे है जो ट्रेन की छत पर बैठे है .सबसे पहले तो उन बहादुरों को सलाम ! पर ये बहादुरी किसी और जगह दिखाई जाय तो ज्यादा अच्छा होगा .

खैर अब सवाल पर आता हूँ , मेरठ हस्तिनापुर में आता है .

(बहादुरी किसी और जगह दिखाई जाये मतलब?

चलिये छोडिये, मेरठ हस्तिनापुर में नहीं आता बल्कि हस्तिनापुर मेरठ में आता है। मेरठ जिले में है, मेरठ शहर से 40 किलोमीटर दूर।)

5. माधव (MADHAV)

एक गुजारिस

मेरे जबाब को ही माधव का भी जबाब माना जाय

(यह गुजारिश माधव के पिताजी मृत्युंजय कुमार राय ने की थी। चूंकि उनका जवाब गलत था तो सीधी सी बात है कि माधव का जवाब भी गलत है।)

इनके अलावा मेरठ शहर के बारे में बेनामियों ने काफी कुछ लिख दिया है। अगर चाहो तो एक नजर उन पर भी मार ली जाये। पढने के लिये यहां क्लिक करें

और अब ये लो, आज की पहेली

SAM_1297

यह भारत में एक रेलवे स्टेशन है- कांधला

आपको इसके बारे में कुछ भी बताना है। किस लाइन पर है, कौन-सी ट्रेनें रुकती हैं, क्या इतिहास है आदि। शर्त ये है कि केवल स्टेशन से सम्बन्धित जानकारी ही होनी चाहिये।

सबसे पहले सही उत्तर देने वाले को मिलेंगे पूरे 100 अंक। उसके बाद सही उत्तर देने वालों को क्रमशः 99, 98, 97, … अंक मिलते चले जायेंगे।

नियम और शर्तें

1. यह पहेली केवल मनोरंजन और थोडे बहुत ज्ञानवर्धन के लिये है। इसके विजेता बनने पर आपको सिवाय अंकों के कुछ भी मिलने वाला नहीं है।

2. आपका उत्तर केवल हिन्दी में ही होना चाहिये। यहां रुकने वाली किसी ट्रेन का नम्बर अंग्रेजी में दिया जा सकता है। ऐसा ना करने पर आपके 5 अंक काट लिये जायेंगे।

3. आप अपना उत्तर अधिकतम 20 शब्दों तक ही दे सकते हैं। अगर इससे ज्यादा शब्द होंगे तो सही उत्तर होने के बावजूद भी गलत माना जायेगा।

4. कोई मॉडरेशन नहीं है। आपकी टिप्पणी यहां तुरन्त दिख जायेगी।

5. जो उत्तर आप देने जा रहे हैं, पहले चेक कर लें कि उसे आपसे पहले किसी ने ना दिया हो। अगर कोई पहले दे चुका है तो आपका उत्तर गलत माना जायेगा।

6. आप उत्तर कहीं से भी ढूंढकर ला सकते हैं।

7. अगर आप कोई आलोचना या सुझाव या इस स्टेशन के बारे में कोई संस्मरण बताना चाहते हैं तो कृपया अलग टिप्पणी में दें। इस टिप्पणी में चाहे कितने भी शब्द हों, आपके उत्तर पर कोई फरक नहीं पडेगा।

8. गलत उत्तर देने पर 5 अंकों का प्रावधान है।

9. आप पहेली छपने के 48 घण्टों के भीतर अपना उत्तर दे सकते हैं। इस पहेली का उत्तर 2 जनवरी 2011 की सुबह आठ बजे तक दिया जा सकता है। इसके बाद आने वाले उत्तरों को कोई अंक नहीं मिलेगा।

10. अगर कोई विवाद होता है तो नीरज जाट द्वारा किया गया फैसला ही अन्तिम माना जायेगा।

11. जाट पहेली के तीसरे दशक की मेरिट लिस्ट साइड बार में लगाई गयी है।

12. भूल चूक लेनी देनी।

Wednesday, December 29, 2010

बद्रीनाथ नहीं, मदमहेश्वर चलो

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
16 नवम्बर 2010 की दोपहर लगभग तीन बजे मैं और मेरा गाइड भरत ऊखीमठ के पास देवरिया ताल के किनारे बैठे थे। भरत चाहता था कि मैं आज की रात दुगलबिट्टा में टेंट में बिताऊं लेकिन मैं खर्चा बचाने के लिये आज ऊखीमठ में ही रुकना चाहता था। भरत ने मेरा विचार मान लिया। यहां ताल से एक सीधा रास्ता सात-आठ किलोमीटर लम्बा ऊखीमठ भी जाता है लेकिन भरत ने कहा कि हम दो हैं और वो रास्ता पूरी तरह जंगली है। जानवरों का डर है। इसलिये जिस रास्ते से आये थे, उसी से वापस जायेंगे यानी सारी के रास्ते से।
कल 17 तारीख है। हमारा कार्यक्रम कल तुंगनाथ-चंद्रशिला देखने का है। परसों जोशीमठ या बद्रीनाथ जाकर कपाट बन्द करवाने हैं। 18 को बन्द हो रहे हैं। उत्तराखण्ड में चार धाम हैं- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ। पांच केदार हैं- केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर। इसी तरह पांच बद्री भी हैं- बद्रीनाथ, आदि बद्री, भविष्य बद्री, योग-ध्यान बद्री और वृद्ध बद्री। इनमें से बद्रीनाथ और मदमहेश्वर को छोडकर सभी के कपाट बन्द हो चुके हैं। बद्रीनाथ 18 को बन्द होंगे और मदमहेश्वर 22 को।
देवरिया ताल के किनारे बैठे-बैठे दिमाग में खलबली मच रही थी। परसों सुबह दुगलबिट्टा से चलकर दोपहर दो बजे तक बद्रीनाथ जाना असम्भव लग रहा था। तो क्यों ना मदमहेश्वर चलें। इस विचार से भरत को अवगत कराया। यह इरादा सुनकर भरत तुरन्त खुश हो गया। खुश हो भी क्यों ना, आखिर दो दिन और ज्यादा गाइडगिरी करने को मिल रही है। उसने बताया कि हम तीन दिन में वहां से वापस लौट आयेंगे। और तीन दिन मेरे पास थे। मदमहेश्वर पर मोहर लग गयी।
साढे तीन बजे का टाइम था। भरत ने बताया कि मदमहेश्वर जाने के लिये पहले उनियाना (उन्याणा) जाना पडेगा। उनियाना के बाद पैदल रास्ता है। ऊखीमठ से उनियाना जाने वाली आखिरी बस चार बजे चलती है। हमारे पास आधा घण्टा था और इस आधे घण्टे में देवरिया ताल से ऊखीमठ जाना असम्भव था। इसलिये तय किया गया कि सीधे मनसूना चलते हैं। यह ताल पहाड की चोटी पर है। यहां से तीन अलग-अलग दिशाओं में पगडंडियां नीचे उतरती है- सारी की दिशा में कंक्रीट की पगडंडी जिसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है, सीधे ऊखीमठ जाने वाली कच्ची पगडंडी जिसका इस्तेमाल पर्यटक कम ही करते हैं और तीसरी है उत्तर की ओर मनसूना जाने वाली कच्ची पगडंडी जिसका इस्तेमाल कभी-कभार स्थानीय निवासी ही करते हैं। तय हुआ कि इस तीसरी पगडंडी से सीधे मनसूना चलते है- घण्टे भर में पहुंच ही जायेंगे। तब तक यानी साढे चार बजे तक ऊखीमठ से चलने वाली आखिरी बस भी मनसूना पहुंच जायेगी।

WAY TO MANSOONA

WAY TO MANSOONA
यह रास्ता महाघनघोर जंगल से भरा है। लगातार नीचे उतरते जाना है। इस जंगल में सबसे ज्यादा डर भालू का है। हमने ताल से ही अपने साथ डंडा ले लिया था। डंडे के दो फायदे थे- एक तो जानवरों से रक्षा और तेजी से नीचे उतरने में सहायक। पूरे रास्ते हमें कोई नहीं मिला। 35 मिनट में हम इस जंगल से बाहर निकल गये।

WAY TO MANSOONA

WAY TO MANSOONA

NEERAJ JAT

A GARHWALI VILLAGE
सामने एक गांव दिख रहा है। इसका नाम अभी थोडी देर पहले तो याद था, अब दिमाग से उतर गया है।

MALTA
यहां माल्टा बहुत होता है। माल्टा संतरे का भाई होता है, रस से भरपूर।

VILLAGE

MALTA

CHAUKHAMBA
इसी गांव से चौखम्भा पर्वत शिखर के प्रथम दर्शन किये।
MANSOONA VILLAGE
सामने नीचे मनसूना गांव दिख रहा है जहां से लगभग साढे चार बजे उनियाना जाने वाली बस मिलेगी। अभी सवा चार बजे हैं। मनसूना तक जाने का रास्ता पक्का पैदल मार्ग है। आराम से पहुंच जायेंगे।
और पहुंच भी गये। उनियाना वाली बस खडी थी। अगर एक मिनट भी लेट हो जाते तो शायद आज उनियाना ना पहुंच पाते। कुछ साल पहले मदमहेश्वर यात्रा मनसूना से शुरू होती थी लेकिन इधर सडक मार्ग का कार्य तेजी से चल रहा है। मनसूना से उनियाना के बीच का रास्ता बेहत खतरनाक है। कहीं-कहीं तो लगता है कि ले भाई, हो गया काम तमाम। हम मैदानी लोगों को लगता है कि सही-सलामत उनियाना पहुंच गये तो पुनर्जन्म हो गया है।
बडे आराम से एक कमरा मिल गया। असल में उनियाना बस अड्डे के पास में ही एक परचून की दुकान है। इसी दुकानदार ने दुकान के नीचे कमरे बना रखे हैं और खाने-पीने का इंतजाम दुकानदार ही करता है।
UNIYANA

UNIYANA

MADMAHESHWAR
यह हमारी देवरिया ताल से उनियाना तक की यात्रा का नक्शा है। देवरिया ताल से मनसूना तक पैदल और उसके बाद बस से।
अब उनियाना के बाद असली सफर शुरू होगा जिसे भरत कहता है कि तीन दिन लगेंगे। उनियाना से मदमहेश्वर की दूरी 22-23 किलोमीटर है और अब हमें इसे तीन दिन में पैदल नापना है।

घुमक्कडी जिन्दाबाद


मदमहेश्वर यात्रा
1. मदमहेश्वर यात्रा
2. मदमहेश्वर यात्रा- रुद्रप्रयाग से ऊखीमठ तक
3. ऊखीमठ के पास है देवरिया ताल
4. बद्रीनाथ नहीं, मदमहेश्वर चलो
5. मदमहेश्वर यात्रा- उनियाना से गौंडार
6. मदमहेश्वर यात्रा- गौंडार से मदमहेश्वर
7. मदमहेश्वर में एक अलौकिक अनुभव
8. मदमहेश्वर और बूढा मदमहेश्वर
9. और मदमहेश्वर से वापसी
10. मेरी मदमहेश्वर यात्रा का कुल खर्च

Monday, December 27, 2010

ऊखीमठ के पास है देवरिया ताल

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
16 नवम्बर 2010 की दोपहर लगभग ग्यारह बजे मैं ऊखीमठ में रुद्रप्रयाग जाने वाली जीप की प्रतीक्षा कर रहा था। तभी पीछे से किसी ने आवाज लगाई। पीछे मुडकर देखा तो एक 27-28 साल का गढवाली युवक एक दुकान में बैठा मुझे बुला रहा था। पूछा कि आप टूरिस्ट है। मुझे टूरिस्ट शब्द से चिढ है, इसलिये मैंने कहा कि नहीं, घुमक्कड हूं। यहां घूमने आया हूं। लेकिन तुम अपनी सुविधा के हिसाब से टूरिस्ट कह सकते हो।
बोला कि आपके बैग में पानी की बोतल लटकी है, इसलिये मैंने पहचान लिया। आपको जाना कहां है?
मैं घूमने के दौरान अक्सर चुपचाप ही रहता हूं और अपना कार्यक्रम किसी को बताना पसंद नहीं करता। फिर भी उसे बता दिया कि रुद्रप्रयाग जा रहा हूं।
“उसके बाद?”
“क्यों?”
“असल में मैं ट्रेकिंग गाइड हूं। ये देखो, मेरा कार्ड। भरत पुष्पवान नाम है मेरा। यही पास में ही गांव है- किमाना, वहां का रहने वाला हूं। अगर किसी सहायता की जरुरत हो तो बताओ।”
“नहीं, मुझे सहायता की कोई जरुरत नहीं है। असल में मुझे बद्रीनाथ जाना था। कल कपाट बन्द हो रहे हैं ना, उसी सिलसिले में। अब इधर से गोपेश्वर की कोई गाडी मिल ही नहीं रही है, इसलिये रुद्रप्रयाग जा रहा हूं, वहां से जोशीमठ जाऊंगा।”
“आप इतनी दूर से चक्कर काटकर जोशीमठ जाओगे। चलिये, मैं आपको सीधे इसी रास्ते से गोपेश्वर ले जाऊंगा। साथ में चोपता तुंगनाथ भी दिखाऊंगा। तुंगनाथ से आगे…”
“चंद्रशिला है। सब पता है मुझे।”
“केवल इतना ही नहीं है। देवरिया ताल भी है, बहुत पैदल चढना पडता है।”
“बहुत नहीं, ये सामने वाली पहाडी के ऊपर ही तो है।” (गूगल अर्थ से पहले ही देखकर चला था।)
“आपको तो सब पता है।”
“हां, मैं हमेशा घूमता रहता हूं और अकेला ही घूमता हूं। मुझे कब कहां जाना है, कैसे जाना है। यह तय करने का अधिकार केवल मुझे है, किसी ट्रेकिंग गाइड को नहीं।”
गाइडों के व्यवहार से अच्छी तरह परिचित हूं। वो गाइड भी क्या, जो किसी शिकार को आसानी से छोड दे। लेकिन यहां मुझे खुद को अनजान ना दिखाकर सर्वज्ञानी दिखाना था कि मैं यहां के बारे में सबकुछ जानता हूं और मुझे गाइड की जरुरत नहीं है।
लेकिन इसने अभी कहा था कि मैं आपको इसी रास्ते से गोपेश्वर ले जाऊंगा। यहां जब गाडी ही नहीं चल रही तो यह कैसे ले जायेगा।
“ये बताओ, तुम अभी कह रहे थे कि इसी रास्ते से गोपेश्वर जा सकते हैं। जरा बताना कि कैसे?
“हम यहां से पहले दुगलबिट्टा जायेंगे…”
“पहले ये बताओ कैसे जायेंगे?”
“वो सामने एक होटल दिख रहा है? उसी की एक शाखा दुगलबिट्टा में भी है। दुगलबिट्टा चोपता के पास ही है। अगर हम यहां होटल में सम्पर्क करते हैं तो वे अपनी गाडी से हमें दुगलबिट्टा छोड देंगे।”
“फिर आगे कैसे जायेंगे?”
“आज आगे जाने की जरुरत नहीं है। हम रात को दुगलबिट्टा में ही रुकेंगे- टेंट में। उनका किराया वैसे तो 800 रुपये है लेकिन मैं कुछ कम करा लूंगा। कल सुबह उठकर पहले चोपता-तुंगनाथ-चंद्रशिला जायेंगे, रात को फिर से टेंट में ही सोयेंगे। परसों सुबह वहां से गोपेश्वर चले जायेंगे।”
“मैंने तुमसे अभी अभी कहा था कि मैं अपना कार्यक्रम खुद बनाता हूं- किसी दूसरे से नहीं बनवाता। फिर क्यों मुझे दुगलबिट्टा ले जाना चाहते हो? ठीक है, ये बताओ कि वहां रात रुकने का कितना खर्चा आयेगा।”
“500 रुपये।”
“मेरी औकात नहीं है 500 रुपये देने की।”
“भाईसाहब, क्या बात कर रहे हो? आप इतनी दूर से आये हो और 500 रुपये की शक्ल देख रहे हो।”
“मेरा साल में एक बार का काम नहीं है, साल भर में दस बार जाता हूं घूमने। इस तरह पैसे बहाने लगा तो हो गयी घुमक्कडी।”
“ठीक है, फिर आपको तुंगनाथ भी तो मिल रहा है।”
“वो तो कल यहां ऊखीमठ से भी मिल जायेगा। सुबह सात बजे वाली बस से। दुगलबिट्टा जाने की जरुरत ही नहीं है।”
“हां, ठीक कह रहे हो।”
“तुम कितने लेते हो।”
“मैं 600 रुपये एक दिन के लेता हूं। एक बार कुछ अंग्रेज आये थे, उन्होंने…”
“यहां कितने लोगे?”
“500 दे देना।”
“200’’
“नहीं, 200 में क्या होता है?”
“कोई बात नहीं, गरज तुम्हे है, मुझे थोडे ही है।”
आखिरकार 400 में सौदा तय हो गया। कल सुबह सात वाली पहली और आखिरी बस से चोपता जाना तय हुआ। लेकिन समस्या आयी कि अब क्या करें। रुद्रप्रयाग तो कैंसिल हो ही गया है। दोपहर का समय है, शाम तक क्या करूंगा।
मैंने कहा- “देख भाई, आज शाम तक का समय है हमारे पास। देवरिया ताल चलते हैं।”
उसने बताया कि पहले सारी गांव जाना पडेगा। सारी के पास तक जीपें चलती हैं। हम सारी पहुंचे। सारी से पैदल ढाई किलोमीटर की पहाडी चढाई है। हमने तेज-तेज चलते हुए 45 मिनट में पार कर ली।
देवरिया ताल उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में ऊखीमठ के पास एक पहाडी पर छोटा सा ताल है। इसके चारों तरफ जंगल हैं। यह समुद्र तल से 2438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
NEAR OKHIMATH

SARI VILLAGE
सारी गांव और पीछे वाली पहाडी की चोटी पर है देवरिया ताल
SARI VILLAGE

SARI VILLAGE
सारी में बैठकर चाय पी
WAY TO DEORIYA TAL
सारी से देवरिया ताल जाने का रास्ता
WAY TO DEORIYA TAL

SARI VILLAGE
कुछ ऊपर से सारी ऐसा दिखता है

SARI VILLAGE
और ऊपर जाने पर ऐसा

NEERAJ JAT

WAY TO DEORIYA TAL

JUNGLE BEGINS HERE

DEORIYA TAL
देवरिया ताल के प्रथम दर्शन

DEORIYA TAL
एक छोटा सा ताल है यह

DEORIYA TAL
खाने-पीने का भी इंतजाम है। एकमात्र होटल।

DEORIYA TAL
यह ताल अपने स्वच्छ पानी के लिये प्रसिद्ध है।

DEORIYA TAL

JAT AT DEORIYA TAL

DEORIYA TAL
देवरिया ताल आने वाले पर्यटकों को 150 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क देना होता है। यह शुल्क वन विभाग लेता है। लेकिन उत्तराखण्ड के निवासियों के लिये कोई शुल्क नहीं है। यह सुनते ही मैं दिल्ली छोड हरिद्वार निवासी हो गया और शुल्क से बच गया।
DEVARIYA TAL
ऊखीमठ से मस्तूरा गांव तक नियमित जीपें है। मस्तूरा से लगभग एक किलोमीटर ऊपर सारी गांव है। वैसे तो मस्तूरा से दो-तीन किलोमीटर आगे एक बैण्ड है जहां से एक सडक सारी तक भी आती है। यानी सारी तक अपनी गाडी से आया जा सकता है। सारी के बाद ढाई-तीन किलोमीटर का पैदल रास्ता है। आने को तो ऊखीमठ से सीधे देवरिया ताल तक भी आ सकते हैं। चित्र में स्पष्ट दिख रहा है कि ताल और ऊखीमठ के बीच में घना जंगल है। यह दूरी लगभग आठ किलोमीटर पैदल है। स्थानीय निवासी इस रास्ते से जाने की मनाही करते हैं क्योंकि यह क्षेत्र जंगली जानवरों से भरा है जिनमें भालू और तेंदुआ प्रमुख हैं। लेकिन ज्यादातर पर्यटक ऊखीमठ से सीधे पैदल चलकर ताल तक जाते हैं और सारी के रास्ते नीचे उतरकर चोपता चले जाते हैं।
चित्र में लाल रेखा मेरे रास्ते को दिखा रही है। मैं और मेरा गाइड भरत मस्तूरा से पैदल चले थे। लेकिन वापस किस रास्ते से उतरे, यह अभी एक रहस्य है। इस रहस्य का उदघाटन परसों करेंगे।

घुमक्कडी जिन्दाबाद


मदमहेश्वर यात्रा
1. मदमहेश्वर यात्रा
2. मदमहेश्वर यात्रा- रुद्रप्रयाग से ऊखीमठ तक
3. ऊखीमठ के पास है देवरिया ताल
4. बद्रीनाथ नहीं, मदमहेश्वर चलो
5. मदमहेश्वर यात्रा- उनियाना से गौंडार
6. मदमहेश्वर यात्रा- गौंडार से मदमहेश्वर
7. मदमहेश्वर में एक अलौकिक अनुभव
8. मदमहेश्वर और बूढा मदमहेश्वर
9. और मदमहेश्वर से वापसी
10. मेरी मदमहेश्वर यात्रा का कुल खर्च

Friday, December 24, 2010

जाट पहेली- 28 (मेरठ छावनी)

पिछले शुक्रवार को जाट पहेली- 27 में पूछा गया था- मथुरा जंक्शन के बारे में।

[MATHURA JN[3].jpg]

मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है। नई दिल्ली से पूरे दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और राजस्थान-गुजरात के कुछ हिस्सों में जाने वाली गाडियां मथुरा से गुजरती हैं। एक गाडी तो नई दिल्ली से हावडा भी जाती है।

कभी मथुरा से बरेली, वृन्दावन, अछनेरा और अलवर जाने वाली लाइनें मीटर गेज थीं, जिनमें से सभी को ब्रॉड गेज में बदल दिया गया है। बरेली वाली लाइन कासगंज तक चालू भी हो चुकी है।

बाकी जानकारी प्रतियोगियों के माध्यम से:

जाट पहेली- 27 के विजेता हैं:


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100 अंक

यहाँ रुकने वाली ट्रेन :
स्वराज एक्स्प्रेस/2472

(बिल्कुल सही उत्तर दिया है आपने। बधाई।)


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99 अंक

मथुरा जंक्शन आगरा दिल्ली मेन रेल लाइन पर स्तिथ हैं.

(आप जाट पहेली में बडी तेजी से अंक बटोर रहे हैं। अभी तक आपने कुल 17 पहेलियों में भाग लिया है और आपके अंक 1000 को पार कर गये हैं। तीसरे दशक में आप दूसरे स्थान पर चल ही रहे है। आपका जाट पहेलियों में भविष्य मंगलमय हो।

आपसे एक शिकायत है। आपने अपना केवल प्रोफाइल बना रखा है, कोई ब्लॉग नहीं है। कृपया अपना एक ब्लॉग बनाइये। अगर है तो उसे सार्वजनिक कीजिये। धन्यवाद।)


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98 अंक

फिरोजपुर जनता एक्सप्रेस

(नरेश जी, आपको गाडी का नम्बर भी बताना चाहिये था। कभी कभी ऐसा होता है कि लिखने वाले जनता एक्सप्रेस लिख देते हैं। अब जनता एक्सप्रेस तो भारत में लगभग हर रूट पर चलती हैं। इसलिये गाडी संख्या जरूरी हो जाता है।)


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97 अंक

देहली नागपुर मेन रेल लाइन

दक्षिण भारत

(दो उत्तर? लेकिन केवल पहले वाला ही सही है। यार, इतने दिन हो गये, आपसे उत्तर देना ही नहीं आया। मैं बताता हूं कि आपने आज तक क्या-क्या उत्तर दिये है?

पहेली-1—मध्य प्रदेश

पहेली-2 उत्तर प्रदेश

पहेली-13—congratulation..

पहेली-14—स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनायें।

पहेली-26—रेवाडी

और आज दक्षिण भारत भी लिख मारा है? क्या दक्षिण भारत? मान जाओ, भाई। स्पष्ट उत्तर दिया करो।)


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97-5= 92 अंक

मथुरा जंक्शन आगरा दिल्ली मेन रेल लाइन
paschim express

(दो उत्तर? आगरा-दिल्ली वाला तो पहले दिया जा चुका है। इसलिये आप नहीं दे सकते थे।

रहा पश्चिम एक्सप्रेस, वो आपने अंग्रेजी में लिखा है, इसलिये 5 नम्बर काटे गये हैं। गाडी के साथ-साथ गाडी संख्या भी बतानी चाहिये थी। )

ये वे प्रतियोगी हैं जिनका उत्तर बिल्कुल सही है लेकिन इन्होंने पहेली के किसी ना किसी नियम को तोडा है। फिर भी आपको 6-6 अंक दिये जा रहे हैं। यह नियम बाद में बना, नहीं तो 5-5 का ही प्रावधान था।


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6 अंक

मथुरा जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन है. तथा यहां से पश्चिम भारत, दक्षिण भारत तथा अनेक प्रान्तों को जाने के लिए महत्वपूर्ण रेल मार्ग उपलब्ध होता है.

मथुरा जंक्शन उत्तर मध्य रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन है.

(आपने दो उत्तर दिये हैं। दोनों के कुल शब्द निर्धारित अधिकतम शब्द संख्या से बहुत अधिक हैं। क्षमा करें।)



6 अंक

मथुरा जंक्शन रेलवे स्टेशन उत्तर-मध्य रेलवे में आता है.

(आपसे पहले यह उत्तर दिया जा चुका था।)

3. बंटी चोर

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6 अंक


दिल्ली से दक्षिण भारत, मुम्बई जाने वाली ट्रेने होकर गुजरती

(बिल्कुल सही उत्तर और कोई कमी नहीं। आप पूरे 99 अंकों के हकदार थे लेकिन निर्णायक दल ने निर्णय किया कि आपको पूरे अंक नहीं मिलेंगे। यह सीधे तौर पर निर्णायक दल की मनमानी है।

इसका कारण यह है कि आपके तुरन्त बाद आने वाले अनामियों की बाढ को आपसे ही जोडकर देखा गया है।)

ये वे हैं जिन्होने गलत उत्तर दिया। इन्हें दिये जाते हैं 5-5 अंक:

1. निर्मला कपिला

सभी विजेताओं को बधाई और मेरे आज के पाँच नम्बर जोड लेना। आशीर्वाद।

(आज की पहेली तो बहुत ही आसान थी। गलत बात है निर्मला जी कि आपने इसके बारे में भी नहीं बताया।)

2. विजय कर्ण

मथुरा की स्तिथि
27°30'N 77°41'E / 27.5°N 77.68°E

(आपने दो स्थान बताये हैं:

27°30'N 77°41'E – मथुरा स्टेशन से आकाशीय दूरी लगभग ढाई किलोमीटर

27.5°N 77.68°E – मथुरा स्टेशन से आकाशीय दूरी लगभग सवा दो किलोमीटर

अगर आप मथुरा स्टेशन के अक्षांश बताते तो ठीक रहता। यह पहेली स्टेशन से सम्बन्धित ही रहती है।

गूगल अर्थ जिन्दाबाद)

3. ओशो रजनीश

मथुरा का कुल क्षेत्रफल : 3329.4 km

(मथुरा जिला नहीं मथुरा स्टेशन पूछा था भाई। वैसे भी क्षेत्रफल किलोमीटर में नहीं होता, वर्ग किलोमीटर में होता है।)

4. anju

नीरज जी,अभी तक तो बंटी चोर ही था ,आज यह इतने सारे चोर एक साथ आपके ब्लॉग पर कैसे आ गए ?यह क्या हों रहा है !!!!!!!!!!!!!!!!!!!

(अंजू जी, खुली धर्मशाला है यह ब्लॉग। जिसका मन करता है, आ ही जाता है। वैसे भी ये लोग पहेली में भाग ना लेते हुए भी पहेली के मकसद को पूरा कर रहे हैं। कितने भले लोग हैं।)

5. राज भाटिय़ा

सभी विजेताओ को बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बधाई, ओर यह लो सारी ट्रेनो की लिस्ट
http://hindi.indiarailinfo.com/departures/249 मैने यहां दे दिया हे सारा विवरण
अब सारे नां० मुझे ही दे दो

(भाटिया जी, आपसे इस उत्तर की उम्मीद नहीं थी। वैसे भी अब यह साइट कोई छुपी साइट नहीं है, बडे काम की है। 5 नम्बर बचे हैं, ले जाओ।)

6. रंजन

हमको पता था जी... :)

(अच्छा, वो साली वाला किस्सा सुना रहे हो।

और मथुरा????)

7. shekhar suman

यहाँ के पेरे बहुत प्रसिद्ध हैं..

(पेरे नहीं महाराज, पेडे।

मथुरा के पेडे। मुंह में पानी आ जाता है। लेकिन यार महंगे बहुत होते हैं।)

इस पहेली की सबसे बडी उपलब्धि रही अनामियों का जोरदार हमला। जैसे ही बंटी चोर को पता चला तो अनामी आ चढे। यहां एक नियम है कि अगर कोई बात पहले बताई जा चुकी है तो उसे दोहराना नहीं है। बस जी, अनामी तो हो गये शुरू मथुरा को खोदने। कंस-कन्हैया और सूरदास से लेकर औरंगजेब तक का मथुरा से क्या सम्बन्ध था, कौन-कौन से मन्दिर कहां कहां हैं रास्ता कैसे है; कुल मिलाकर मथुरा की सारी जानकारी दे दी। अगर मुझे मथुरा के बारे में लिखना पडेगा तो मैं इन्ही अनामियों की टिप्पणियों को कॉपी-पेस्ट कर दूंगा। कमाल की जानकारी दी। मथुरा का कण-कण बता दिया।
लेकिन…
रेलवे स्टेशन से दूर-दूर ही रहे। जाट कहता है कि स्टेशन से बाहर मत निकलो, जो बताना है स्टेशन के बारे में ही बताओ। अगर ये अनामी मथुरा को खोदने की बजाय स्टेशन को खोदते, तो सोचो क्या हाल होता। होता क्या, पहेली का मकसद पूरा हो जाता। पहेली का मकसद है स्टेशन के बारे में जानकारी जुटाना। अगर यह जानकारी अनामी जुटा देते तो पहेली में अंक किसे मिलते? सभी को 5-5, 6-6 ही मिलते। बस।
भाई अनामियों, ताऊ-वाऊ के पीछे पडना छोडो, जाट के पीछे पडो। पीछे भी मत पडो, साथ चलो। आज एक आसान सा स्टेशन उठाकर लाया हूं, खोद डालो। एक-एक ईंट को उखाड दो। लेकिन यार, अनामी के ही नाम से टिप्पणी करो। किसी सोनिया गांधी, राहुल गांधी, रतन टाटा या मनमोहन सिंह को मत लाओ पहेली में। टिप्पणी में लिंक भी मत दो, नहीं तो मेरे यहां आपकी टिप्पणियां स्पैम में आती हैं, मुझे फेंकनी पडती हैं।
और किसी के बारे में अश्लील शब्दों का प्रयोग मत करो। हमारा मकसद साफ है, इसे साफ ही रहने दो।

और अब ये लो, आज की पहेली

यह भारत में एक रेलवे स्टेशन है- मेरठ छावनी

आपको इसके बारे में कुछ भी बताना है। किस लाइन पर है, कौन-सी ट्रेनें रुकती हैं, क्या इतिहास है आदि। शर्त ये है कि केवल स्टेशन से सम्बन्धित जानकारी ही होनी चाहिये।

सबसे पहले सही उत्तर देने वाले को मिलेंगे पूरे 100 अंक। उसके बाद सही उत्तर देने वालों को क्रमशः 99, 98, 97, … अंक मिलते चले जायेंगे।

नियम और शर्तें

1. यह पहेली केवल मनोरंजन और थोडे बहुत ज्ञानवर्धन के लिये है। इसके विजेता बनने पर आपको सिवाय अंकों के कुछ भी मिलने वाला नहीं है।

2. आपका उत्तर केवल हिन्दी में ही होना चाहिये। यहां रुकने वाली किसी ट्रेन का नम्बर अंग्रेजी में दिया जा सकता है। ऐसा ना करने पर आपके 5 अंक काट लिये जायेंगे।

3. आप अपना उत्तर केवल एक टिप्पणी में अधिकतम 10 शब्दों तक ही दे सकते हैं। अगर इससे ज्यादा शब्द होंगे तो सही उत्तर होने के बावजूद भी गलत माना जायेगा।

4. कोई मॉडरेशन नहीं है। आपकी टिप्पणी यहां तुरन्त दिख जायेगी।

5. आपका उत्तर आपके पहले वाले किसी भी उत्तर से मेल नहीं खाना चाहिये। अन्यथा गलत माना जायेगा। मतलब साफ है कि हरेक सही उत्तर में हमेशा कुछ ना कुछ नई जानकारी मिलेगी। आपसे पहले ही कोई पूरी जानकारी ना दे, इसीलिये 10 शब्दों की बाध्यता रखी गयी है।

6. आप उत्तर कहीं से भी ढूंढकर ला सकते हैं। लेकिन ध्यान रखना कि वो उत्तर आपसे पहले किसी ने ना दिया हो।

7. अगर आप कोई आलोचना या सुझाव या इस स्टेशन के बारे में कोई संस्मरण बताना चाहते हैं तो कृपया अलग टिप्पणी में दें। इस टिप्पणी में चाहे कितने भी शब्द हों, आपके उत्तर पर कोई फरक नहीं पडेगा।

8. गलत उत्तर देने पर 5 अंकों का प्रावधान है।

9. आप पहेली छपने के 48 घण्टों के भीतर अपना उत्तर दे सकते हैं। इस पहेली का उत्तर 26 दिसम्बर 2010 की सुबह आठ बजे तक दिया जा सकता है। इसके बाद आने वाले उत्तरों को कोई अंक नहीं मिलेगा।

10. अगर कोई विवाद होता है तो नीरज जाट द्वारा किया गया फैसला ही अन्तिम माना जायेगा।

11. जाट पहेली के तीसरे दशक की मेरिट लिस्ट साइड बार में लगाई गयी है।

12. भूल चूक लेनी देनी।