Monday, August 30, 2010

शेषनाग झील

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अमरनाथ यात्रा में शेषनाग झील का बहुत महत्त्व है। यह पहलगाम से लगभग 32 किलोमीटर दूर है, और चन्दनवाडी से लगभग 16 किलोमीटर। तो इस प्रकार सोलह किलोमीटर की पैदल यात्रा करके इस झील तक पहुंचा जा सकता है। यह झील सर्दियों में पूरी तरह जम जाती है। यात्रा आते-आते पिघलती है। कभी-कभी तो यात्रा के सीजन में भी नहीं पिघलती। इसके चारों ओर चौदह-पन्द्रह हजार फीट ऊंचे पर्वत हैं।
कहते हैं कि जब शिवजी माता पार्वती को अमरकथा सुनाने अमरनाथ ले जा रहे थे, तो उनका इरादा था कि इस कथा को कोई ना सुने। अगर कोई दूसरा इसे सुन लेगा, तो वो भी अमर हो जायेगा और सृष्टि का मूल सिद्धान्त गडबड हो जायेगा। सभी इसे सुनकर अमर होने लगेंगे। इसी सिलसिले में उन्होनें अपने असंख्य सांपों-नागों को अनन्तनाग में, बैल नन्दी को पहलगाम में, चन्द्रमा को चन्दनवाडी में छोड दिया था। लेकिन अभी भी उनके साथ शेषनाग था जिसे उन्होनें इस झील में छोड दिया। शंकर जी ने शेषनाग को आदेश दिया था कि इस स्थान से आगे कोई ना जाने पाये। यह भी कहा जाता है कि कभी-कभी झील के पानी में शेषनाग दिखाई भी देता है। मेरे ख्याल से ऐसा हो सकता है कि झील में बहुत सी नदियां आकर मिलती हैं, फिर यहां कडाके की ठण्ड भी पडती है। पानी जम भी जाता है। इन सब घटनाओं के कारण ही कभी-कभी शेषनाग जैसी आकृति बन जाती होगी।
इस झील के चारों ओर कई ग्लेशियर हैं। यही से लिद्दर नदी निकलती है, जो पहलगाम की सुन्दरता में दस चांद लगा देती है। इसी के किनारे पर एक तम्बू नगरी भी लग जाती है। सुबह पहलगाम से चले यात्री शाम तक ही यहां पहुंच पाते हैं। यहां पर यात्री रात्रि-विश्राम करते हैं। कुछ यात्री इसमें स्नान भी करते हैं। स्नान करने वालों में दो तरह के लोग होते हैं: एक, धर्मभीरू जो सोचते हैं कि अगर इसमें स्नान ना किया तो शंकर जी नाराज हो जायेंगे। दूसरे, अति दुस्साहसी जो ज्यादातर दिखावे के कारण नहाते हैं कि हमें देखो, हममें है हिम्मत इस झील में नहाने की। मेरे अन्दर उपरोक्त दोनों ही गुणों का अभाव है। इसलिये इस बर्फीली झील में नहीं नहाया।
किनारे पर कुछ ऊपर तम्बू नगर बसा होता है। भण्डारे होते हैं, दुकानें होती हैं और सोने के लिये तम्बू होते हैं। हमारे दल में दो जने दिल्ली पुलिस में थे, वे दिल्ली से ही कुछ जुगाड करके लाये थे कि हमें सीआरपीएफ के ही तम्बू में जगह मिल गयी- फ्री में। ओढने के लिये स्लीपिंग बैग थे। उसमें घुस गये, चैन बन्द की और चैन से सोये।

SHESHNAG
सामने शेषनाग झील दिख रही है।

DHARMBEER
शेषनाग किनारे धर्मबीर। थोडी देर पहले बूंदा-बांदी हो रही थी, इसलिये रेनकोट पहन रखा है। चश्मा शौकीनी के लिये नहीं बल्कि मजबूरीवश लगा रखा है। पहाडों पर बर्फ से चौंध ना लगे, इसलिये।

SHEEP AT SHESHNAG
बरफ पिघलती है, तो जमीन पर घास उगने लगती है। गडरिये अपनी भेडों को बहुत दूर-दूर तक ले जाते हैं।
TENT
ये तम्बू गडरियों के हैं। उन्हें मुख्य तम्बू नगरी में घुसने की इजाजत नहीं है। इजाजत हो भी तो वे वहां रह नहीं पायेंगे, क्योंकि उसमें किराया लगता है। इसलिये स्थानीय लोग अपने तम्बू जहां भी जगह मिली, लगा लेते हैं।

TENT CITY
ऊपर जो एक सफेद लकीर सी दिख रही है, वहां मुख्य तम्बू नगर है। नीचे गडरियों के तम्बू हैं। अभी हमें कम से कम दो किलोमीटर और चलना है।

SHESHNAG 2
CRPF
सुरक्षा पोस्ट

SHESHNAG 3
झील का पानी बिल्कुल साफ है। अत्यधिक ठण्ड के कारण ऊपर बरफ की पपडी जमने लगी है। इसीलिये प्रतिबिम्ब धुंधला सा दिख रहा है।

RIVERS
झील में चारों ओर से कई नदियां मिलती हैं- सीधे ग्लेशियरों से निकल कर।

GLACIER
ऐसे भीमकाय ग्लेशियर यहां चारों ओर हैं।

TENT COLONY
मुख्य तम्बू नगर। सुबह छह बजे से दोपहर ग्यारह-साढे ग्यारह बजे तक पहलगाम से जत्था छोडा जाता है। यह जत्था शाम तक यहां पहुंच जाता है। जितने भी लोग होते हैं, सभी के लिये पर्याप्त तम्बू होते हैं। लेकिन यात्रियों को उनमें रुकने का किराया देना होता है। यह ठेका स्थानीय लोगों को ही दिया जाता है। एक तम्बू का किराया प्रति रात्रि 500 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक का होता है। यह अन्तर तम्बू में उपलब्ध बिस्तरों की वजह से होता है।

SHESHNAG 4
PITTHOO
3 IDIOTS
मनदीप (बीच में) हालांकि खच्चर पर पहले आ गया था। उसे बुखार हो गया था। एक टेण्ट में कहवा पी रहे हैं।

SHESHNAG 5
तम्बू नगरी की ओर जाते हुए

SUNSET
शाम का नजारा

MEERUT AT SHESHNAG
पूरी यात्रा में खाने की कोई दिक्कत नहीं होती। फ्री में भण्डारे मिलते हैं। खाने की सब चीजें एक से बढकर एक होती हैं।

MILK AT SHESHNAG
यह हरियाणा के किसी शहर वालों का भण्डारा था। गर्मागरम दूध मिल रहा है। मेरठ वाले भण्डारे में स्पेशल किस्म का घेवर भी मिला था।

CRPF 2
सीआरपीएफ

AT SHESHNAG
शाम के समय भण्डारों का नजारा।

SLEEPING BAG
खाना खाकर स्लीपिंग बैग में घुस गये। धर्मबीर और मनदीप।

SLEEPING BAG 2
शहंशाह, कालू और बिल्लू। यहां पर एक मजेदार घटना घट गयी। इन स्लीपिंग बैगों में घुसकर पेट के ऊपर से चैन बन्द कर लेनी थी। सांस लेने के लिये मुंह के पास खुला स्थान था। हम सभी के पेटों में गैस बनने लगी। जितना रोकते, उतनी ही ज्यादा लीक होने लगी। मुंह बाहर निकालें, तो ठण्ड लगे। बैग को खोलकर रीफ्रेश भी नहीं कर सकते ठण्ड की वजह से। कुल मिलाकर यहां बेहतरीन सुविधा होने के बावजूद भी नींद नहीं आयी।

(अगले भाग में जारी)
घुमक्कडी जिन्दाबाद

अमरनाथ यात्रा
1. अमरनाथ यात्रा
2. पहलगाम- अमरनाथ यात्रा का आधार स्थल
3. पहलगाम से पिस्सू घाटी
4. अमरनाथ यात्रा- पिस्सू घाटी से शेषनाग
5. शेषनाग झील
6. अमरनाथ यात्रा- महागुनस चोटी
7. पौषपत्री का शानदार भण्डारा
8. पंचतरणी- यात्रा की सुन्दरतम जगह
9. श्री अमरनाथ दर्शन
10. अमरनाथ से बालटाल
11. सोनामार्ग (सोनमर्ग) के नजारे
12. सोनमर्ग में खच्चरसवारी
13. सोनमर्ग से श्रीनगर तक
14. श्रीनगर में डल झील
15. पटनीटॉप में एक घण्टा

Friday, August 27, 2010

जाट पहेली – 16 (आदर्श नगर)

पिछले शुक्रवार को जाट पहेली – 15 में हमने आपको एक चित्र दिखाया था – चण्डीगढ वाला।

PICT0809

 

अम्बाला छावनी- लुधियाना के बीच में एक स्टेशन है- सरहिन्द जं। यहां से एक लाइन आनन्दपुर साहिब होते हुए नंगल डैम जाती है और आगे ऊना तक चली जाती है। इसी सरहिन्द- ऊना लाइन पर है- मोरिण्डा।

चण्डीगढ से एक लिंक लाइन मोरिण्डा तक जाती है। इस पर मोहाली भी पडता है। चण्डीगढ से मोरिण्डा तक कई गाडियां हैं, सभी नंगल डैम जाती हैं। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि चण्डीगढ से तीसरी लाइन नंगल डैम जाती है।

ज्यादातर प्रतियोगियों ने बताया कि चण्डीगढ से तीसरी लाइन लुधियाना जाती है। अगर चण्डीगढ-लुधियाना लाइन अभी बन रही है, तो बनने दो। फिलहाल लुधियाना जाने के लिये चण्डीगढ से कोई सीधी गाडी भी नहीं है। अम्बाला छावनी से बदलनी पडेगी। तो यह उत्तर गलत है। 

 

MAP 2

खैर, चलिये पहेली – 15 के विजेताओं की तरफ: 

जाट पहेली – 15 के विजेता इस प्रकार हैं:

पहले स्थान पर रहे -

seema gupta

seema gupta 3

(100 अंक)

टिप्पणी 1- तीसरी लाइन चंडीगढ़ से लुधिआना जाती है जो पंजाब के मोरिंडा तक जाती है
regards

टिप्पणी 2- सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई
regards

(तीसरी लाइन चण्डीगढ से लुधियाना नहीं जाती है। हां, मोरिण्डा जरूर जाती है। प्रथम आने की बधाई। तालियां, जोरदार तालियां।

रैंक: आप कुल 105 अंकों के साथ 11वें स्थान पर आ गयी हैं। पिछली बार आप 23 वें पर थीं।)

 

दूसरे स्थान पर रहे –

रंजन

 ranjan aditya
(99 अंक)

टिप्पणी 1: तीसरी लाईन मिली है..
चंडीगढ़ से मोहाली, रूपनगर आनंदपुर साहेब और नांगल होते हुए उना..
भाटिया जी को धन्यवाद.. :)

(आपका उत्तर बिल्कुल ठीक है। दूसरे स्थान पर आने की बधाई।

रैंक: आप 497 अंकों के साथ दूसरे दशक में पहले स्थान पर बरकरार हो।)

 

तीसरे स्थान पर रहे -

ritesh

ritesh  
(98 अंक)


टिप्पणी :
नीरज जी नमस्कार, चंडीगढ़ से तीसरी लाइन मोरिंडा पंजाब तक जाती हैं जो न्यू चंडीगढ़ लुधिआना रेल लिंक पर हैं.
धन्यवाद...

(हो सकता है कि कोई नई लाइन बन रही हो सीधे लुधियाना के लिये लेकिन अभी तो मोरिण्डा तक ही चल रही है।

रैंक: आप 388 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गये हो। पिछली बार आप चौथे पर थे।)

 
ये रहे वे प्रतियोगी जिन्होने गलत उत्तर दिये, या उत्तर दिये ही नहीं:

इन्हे दिये जाते हैं पांच-पांच अंक

 

प० अनिल जी शर्मा http://anilastrologer.blogspot.com/

टिप्पणी 1: चंडीगढ़ से लुधियाना तक नयी रेलवे लाइन बनी है.

टिप्पणी 2: चंडीगढ़ से लुधियाना तक.....

(रैंक: आप 191 अंकों के साथ आठवें पर पहुंच गये हैं। पिछली बार आप 9वें पर थे।)

संजय भभुआ

टिप्पणी: भाई वैसे तो बिलकुल पता नहीं.गूगल देव से पूछा तो उत्तर ऐसा लगा.
चंडीगढ़ से बड्डी की ओर नई लाइन जाएगी..
आगे आप तो बता ही देंगे..

(चलो हम ही बता देते हैं। लुधियाना वाला मामला तो आप समझ ही गये हैं। जिस बद्दी की बात आप कर रहे हैं, वो लाइन चण्डीगढ से नहीं जायेगी, बल्कि कालका से जायेगी। अभी उसका निर्माण कार्य चल रहा है। और हां, मुझे पक्का मालूम नहीं है कि वो नई लाइन बद्दी जायेगी या परवाणू। शायद परवाणू जायेगी।

रैंक: आप 297 अंकों के साथ चौथे पर खिसक गये हो। पिछली बार तीसरे पर थे।)

Udan Tashtari

टिप्पणी: ताऊ को निपटा दिया, उतना काफी है मेरे लिए...हा हा!!
वैसे पहेली की शर्तों मं कहिं दिखा नहीम कि अंग्रेजी मे जबाब देने के ५ अंक काटे जायेंगे. :)

(समीर जी, सभी पहेलियों के नीचे जो डिब्बा बना है, उसमें ज्यादातर नियम लिखे हैं। उसी में यह अंग्रेजी वाला नियम भी है।

रैंक: आप 107 अंकों के साथ 10वें स्थान पर बरकरार हो।)

Ratan Singh Shekhawat

टिप्पणी: तीसरी लाइन लुधियाना के लिए है

(रैंक: आप 99 अंकों के साथ 17वें स्थान पर खिसक गये हैं। पिछली बार 16वें पर थे।)

ललित शर्मा-للت شرما

टिप्पणी: जवाब तो हमने भी दिया था
लेकिन हमारा जवाब तो दिख ही नही रहा:)

(ललित जी, आपने 14वीं पहेली में नहीं बल्कि 13वीं पहेली में उत्तर दिया था। आपका उत्तर सही था और आपको 98 अंक मिले थे।

रैंक: आप 103 अंकों के साथ 13वें स्थान पर हो। पिछली बार 15वें पर थे।)

प्रयास

टिप्पणी: चंडीगढ - लुधीयाना रेल लाईन.

(रैंक: आप पिछली बार 13वें पर थे, अब 12वें स्थान पर हो।)

अन्तर सोहिल

टिप्पणी 1: लुधियाना जाती है जी
प्रणाम

टिप्पणी 2: चण्डीगढ-लुधियाना
110 किमी का ट्रैक है शायद
राम-राम जी

टिप्पणी 3: केवल मुझसे पूछे गये आपके सवाल का जवाब पिछली पोस्ट की टिप्पणी नंO 3 में है।
प्रणाम

(मतलब सब मामला खत्म। बढिया है।

रैंक: आपके 390 अंक हैं और आप दूसरे स्थान पर बने हैं।)

राज भाटिय़ा

टिप्पणी 1: रोहतक जी

(रैंक: आप 290 अंकों के साथ पांचवे स्थान पर बरकरार हो।)

 

और अब आज की पहेली

ADARSH NAGAR

यह एक रेलवे स्टेशन है – आदर्श नगर। आपको बताना है कि यह स्टेशन भारत में किस रेल खण्ड पर है।

इस पहेली में रेल खण्ड का अर्थ है- दो स्टेशनों के बीच की रेल लाइन। यानी यह स्टेशन किन दो स्टेशनों के बीच में है। आज सटीकता का कोई चक्कर नहीं है। बस, वे दो स्टेशन बताने हैं जिनके बीच में यह स्टेशन स्थित है। चाहे वे पास-पास हों या दूर-दूर।

अगर आप स्टेशन नहीं बताते हैं तो किसी ऐसी ट्रेन का नम्बर बता दें जो यहां रुकती है।

सबसे पहले सही उत्तर देने वाले को मिलेंगे पूरे 100 अंक। उसके बाद क्रमशः 99, 98, 97, … होते चले जायेंगे।

 

यह पहेली केवल मनोरंजन और थोडे बहुत ज्ञानवर्धन के लिये है। इसके विजेता बनने पर आपको मेरी तरफ से बधाई दी जायेगी और आपके ब्लॉग का लिंक अगले शुक्रवार को हमारे यहां आपके फोटू सहित छापा जायेगा।
इसके जवाब देने की अन्तिम तिथि 29 अगस्त 2010 के सुबह के दस बजे तक है। उपरोक्त तिथि के बाद प्राप्त होने वाले जवाबों पर गौर नहीं किया जायेगा और उन्हें कोई अंक नहीं दिया जायेगा।

नोट: कृपया कम से कम शब्दों में अपने उत्तर लिखें। इससे आपको भी आसानी रहेगी और मुझे भी।

 आपका उत्तर केवल हिन्दी में ही होना चाहिये। अंग्रेजी में उत्तर देने पर आपके 5 अंक काट लिये जायेंगे।

टिप्पणी मॉडरेशन चालू है। 29 अगस्त 2010 के सुबह दस बजे के बाद ही आपकी टिप्पणियां दिखाई पड सकती हैं।

गलत उत्तर देने पर भी 5 अंक मिल जायेंगे।

दूसरे दशक की सभी पहेलियों की मेरिट लिस्ट साइड बार में लगाई गयी है।

भूल चूक लेनी देनी।

 
अगर पहेली को और ज्यादा मनोरंजन बनाने के लिये आपके किसी के भी पास कोई सुझाव हो, तो कृपया तुरन्त बता दें। आपके सुझावों को कम से कम एक बार लागू करके तो देख ही लिया जायेगा। आपके सुझावों की प्रतीक्षा है। धन्यवाद।
हां, इस पहेली में सभी फोटो मेरे खुद के खींचे हुए हैं। किसी अन्य के फोटो स्वीकार नहीं किये जायेंगे।

Monday, August 23, 2010

अमरनाथ यात्रा- पिस्सू घाटी से शेषनाग

इस यात्रा-वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
अमरनाथ यात्रा की पैदल चढाई चन्दनवाडी से शुरू होती है। चन्दनवाडी पहलगाम से सोलह किलोमीटर आगे है। चन्दनवाडी से कठिन चढाई चढकर यात्री पिस्सू टॉप पहुंचते हैं। पिस्सू टॉप तक का रास्ता काफी मुश्किल है, आगे का रास्ता कुछ कम मुश्किल है। कुछ दूर तक तो उतराई ही है। अधिकतर यात्री चन्दनवाडी से यहां तक खच्चर से आते हैं। आगे की यात्रा पैदल करते हैं। लेकिन कुछ यात्री ऐसे भी होते हैं, जो पिस्सू टॉप तक पैदल आते हैं और इस मुश्किल चढाई में उनका मामला गडबड हो जाता है। आगे चलने लायक नहीं रहते। इसलिये उन्हे आगे के अपेक्षाकृत सरल रास्ते में खच्चर करने पडते हैं। हमारे दल में मनदीप भी ऐसा ही था। पिस्सू टॉप तक पहुंचने में ही पैर जवाब दे गये और आगे शेषनाग के लिये खच्चर करना पडा।
यह इलाका समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर है, इसलिये सूर्य की किरणें बहुत तीखी लगती हैं। उनसे बचने के लिये कोल्ड क्रीम लगानी पडती है। कोल्ड क्रीम मनदीप के पास थी, लेकिन उसके खच्चर पर जाने से पहले ही सभी ने अपने-अपने मुंह पोत लिये थे। यहां भी शहंशाह भागमभाग में लगा था। बिल्लू की हालत भी काफी खराब थी। इसके बावजूद भी उसने खच्चर नहीं किया, फलस्वरूप सबसे पीछे चल रहा था। बाकी मैं, कालू और धर्मबीर साथ-साथ थे।
हिमालय की ऊंचाइयों में एक खास बात है कि यहां दोपहर बाद मौसम खराब होने लगता है। दो बजे के बाद यहां भी मौसम बदलने लगा। जहां थोडी देर पहले तीखी धूप पड रही थी, अब बाद्ल छा गये। बादल छाते ही कडकडाती ठण्ड लगनी शुरू हो गयी। नीचे की तरफ से काले बादल भी दिखने लगे। अब हम समझ गये कि कुछ देर बाद बारिश भी हो सकती है। इसलिये हमने अपनी चलने की स्पीड तेज कर दी। मन में था कि बारिश होने से पहले शेषनाग पहुंच जाये।
लेकिन हमारे शेषनाग पहुंचने से पहले ही बारिश भी हो गयी। रेनकोट साथ लाये थे, इसलिये बच गये। नहीं तो किसी बडे से पत्थर के नीचे बैठना पडता। यात्रा में काफी संख्या में साधु आते हैं। इनमें से ज्यादातर बहुत कम कपडों में होते हैं। कोई-कोई तो नंगे पैर होता है। बारिश हुई तो सभी पत्थरों के नीचे बैठ गये। इन बडे-बडे पत्थरों से तेज हवा से भी बचाव हो रहा था और बारिश से भी।
खैर, बारिश होती रही और हम शेषनाग झील के पास जा पहुंचे। यह चन्दनवाडी से 15-16 किलोमीटर दूर है। चन्दनवाडी के बाद रात बिताने का इन्तजाम यही पर है। इसलिये चन्दनवाडी से निकलने के बाद हर एक यात्री को शेषनाग पहुंचना ही पडता है।

PISSOO TOP
अब हम पिस्सू टॉप से निकल चुके हैं। पीछे मुडकर देखने पर ऐसा दिखता है पिस्सू टॉप।

MANDEEP AND ME
अब हम पिस्सू टॉप से निकल चुके हैं। पीछे मुडकर देखने पर ऐसा दिखता है पिस्सू टॉप।
दो लठधारी जाट। मनदीप और मैं।
PITTHOO
बोझा ढोने का सारा काम इन स्थानीय मुसलमानों का ही है।

SHOO-SHOO
अबे, कहां खडा होकर शू-शू कर रहा है।

AMARNATH YATRA
आज का लक्ष्य है- शेषनाग।

SURAKSHA CHAUKI
यह है यहां की सुरक्षा चौकी। चौकी के पीछे चारों तरफ बरफ है।

MANDEEP
जब मनदीप के घुटने जवाब दे गये तो बेचारे को खच्चर करना पडा। फोटू खिंचवाने में शर्म आयी तो मुंह ढक लिया।

NATURE
रास्ते में पडने वाले दृश्य मन मोह लेते हैं।

SHEEP
पहलगाम के गडरिये इतनी दूर तक भेड चराने आते हैं। सर्दियां खत्म होने के बाद बरफ पिघलती है तो जमीन पर घास उगने लगती है।
इसी तरह के किसी गडरिये बूटा मलिक ने अमरनाथ गुफा की खोज की थी।

NATURE 2
A SADHU
साधु भी बडी संख्या में अमरनाथ जाते हैं।

JOJPAL
सामने है जोजपाल। यह असल में एक चरागाह है। लेकिन आजकल यहां भण्डारे लगे हुए हैं।

EATING PAKAUDI
चाय पकौडी का मजा लो और आगे बढो।

WAITING FOR FOOD
भण्डारों के बाहर स्थानीय लोगों का जमावडा लगा रहता है। इसका कारण है कि भण्डारों में इन लोगों को आने नहीं दिया जाता। कहीं कहीं इनका टाइम निर्धारित होता है कि इस समय के बाद आओ। कहीं –कहीं तो इनके लिये मुख्य भण्डारे की बगल में एक छोटा सा भण्डारा होता है जहां इन्हे चाय, रोटी, सब्जी मिल जाते हैं। जबकि यात्रियों के लिये एक से एक बढकर आइटम होता है।

AMARNATH YATRI
जय बाबा बर्फानी

WATER
पूरी यात्रा के पैदल मार्ग में जम्मू-कश्मीर पुलिस नहीं दिखी। जबकि सीआरपी, बीएसएफ व सेना जगह-जगह यात्रियों की सेवा में लगी थी। यहां सुरक्षा बल पानी पिला रहे हैं।

YATRA
NEAR A WATERFALL
इस झरने तक आते-आते मौसम खराब होने लगा था।

NEERAJ
जल्दबाजी में एक फोटू खिंचवाया और भाग चले।

LIDDAR RIVER
दूर नीचे जाती लिद्दर। लिद्दर नदी शेषनाग झील से ही निकलती है।

GREAT AMARNATH YATRA
AMARNATH YATRA 2
SHESHNAG
और वो दिख गयी शेषनाग झील।
झील के उस ओर बायीं तरफ तम्बू नगरी बसी है। आज रात्रि विश्राम वहीं पर होगा।

(अगले भाग में जारी)
घुमक्कडी जिन्दाबाद

अमरनाथ यात्रा
1. अमरनाथ यात्रा
2. पहलगाम- अमरनाथ यात्रा का आधार स्थल
3. पहलगाम से पिस्सू घाटी
4. अमरनाथ यात्रा- पिस्सू घाटी से शेषनाग
5. शेषनाग झील
6. अमरनाथ यात्रा- महागुनस चोटी
7. पौषपत्री का शानदार भण्डारा
8. पंचतरणी- यात्रा की सुन्दरतम जगह
9. श्री अमरनाथ दर्शन
10. अमरनाथ से बालटाल
11. सोनामार्ग (सोनमर्ग) के नजारे
12. सोनमर्ग में खच्चरसवारी
13. सोनमर्ग से श्रीनगर तक
14. श्रीनगर में डल झील
15. पटनीटॉप में एक घण्टा