Buy My Book

Wednesday, December 29, 2010

बद्रीनाथ नहीं, मदमहेश्वर चलो

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
16 नवम्बर 2010 की दोपहर लगभग तीन बजे मैं और मेरा गाइड भरत ऊखीमठ के पास देवरिया ताल के किनारे बैठे थे। भरत चाहता था कि मैं आज की रात दुगलबिट्टा में टेंट में बिताऊं लेकिन मैं खर्चा बचाने के लिये आज ऊखीमठ में ही रुकना चाहता था। भरत ने मेरा विचार मान लिया। यहां ताल से एक सीधा रास्ता सात-आठ किलोमीटर लम्बा ऊखीमठ भी जाता है लेकिन भरत ने कहा कि हम दो हैं और वो रास्ता पूरी तरह जंगली है। जानवरों का डर है। इसलिये जिस रास्ते से आये थे, उसी से वापस जायेंगे यानी सारी के रास्ते से।
कल 17 तारीख है। हमारा कार्यक्रम कल तुंगनाथ-चंद्रशिला देखने का है। परसों जोशीमठ या बद्रीनाथ जाकर कपाट बन्द करवाने हैं। 18 को बन्द हो रहे हैं। उत्तराखण्ड में चार धाम हैं- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ। पांच केदार हैं- केदारनाथ, मदमहेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर। इसी तरह पांच बद्री भी हैं- बद्रीनाथ, आदि बद्री, भविष्य बद्री, योग-ध्यान बद्री और वृद्ध बद्री। इनमें से बद्रीनाथ और मदमहेश्वर को छोडकर सभी के कपाट बन्द हो चुके हैं। बद्रीनाथ 18 को बन्द होंगे और मदमहेश्वर 22 को।
देवरिया ताल के किनारे बैठे-बैठे दिमाग में खलबली मच रही थी। परसों सुबह दुगलबिट्टा से चलकर दोपहर दो बजे तक बद्रीनाथ जाना असम्भव लग रहा था। तो क्यों ना मदमहेश्वर चलें। इस विचार से भरत को अवगत कराया। यह इरादा सुनकर भरत तुरन्त खुश हो गया। खुश हो भी क्यों ना, आखिर दो दिन और ज्यादा गाइडगिरी करने को मिल रही है। उसने बताया कि हम तीन दिन में वहां से वापस लौट आयेंगे। और तीन दिन मेरे पास थे। मदमहेश्वर पर मोहर लग गयी।
साढे तीन बजे का टाइम था। भरत ने बताया कि मदमहेश्वर जाने के लिये पहले उनियाना (उन्याणा) जाना पडेगा। उनियाना के बाद पैदल रास्ता है। ऊखीमठ से उनियाना जाने वाली आखिरी बस चार बजे चलती है। हमारे पास आधा घण्टा था और इस आधे घण्टे में देवरिया ताल से ऊखीमठ जाना असम्भव था। इसलिये तय किया गया कि सीधे मनसूना चलते हैं। यह ताल पहाड की चोटी पर है। यहां से तीन अलग-अलग दिशाओं में पगडंडियां नीचे उतरती है- सारी की दिशा में कंक्रीट की पगडंडी जिसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है, सीधे ऊखीमठ जाने वाली कच्ची पगडंडी जिसका इस्तेमाल पर्यटक कम ही करते हैं और तीसरी है उत्तर की ओर मनसूना जाने वाली कच्ची पगडंडी जिसका इस्तेमाल कभी-कभार स्थानीय निवासी ही करते हैं। तय हुआ कि इस तीसरी पगडंडी से सीधे मनसूना चलते है- घण्टे भर में पहुंच ही जायेंगे। तब तक यानी साढे चार बजे तक ऊखीमठ से चलने वाली आखिरी बस भी मनसूना पहुंच जायेगी।

WAY TO MANSOONA

WAY TO MANSOONA
यह रास्ता महाघनघोर जंगल से भरा है। लगातार नीचे उतरते जाना है। इस जंगल में सबसे ज्यादा डर भालू का है। हमने ताल से ही अपने साथ डंडा ले लिया था। डंडे के दो फायदे थे- एक तो जानवरों से रक्षा और तेजी से नीचे उतरने में सहायक। पूरे रास्ते हमें कोई नहीं मिला। 35 मिनट में हम इस जंगल से बाहर निकल गये।

WAY TO MANSOONA

WAY TO MANSOONA

NEERAJ JAT

A GARHWALI VILLAGE
सामने एक गांव दिख रहा है। इसका नाम अभी थोडी देर पहले तो याद था, अब दिमाग से उतर गया है।

MALTA
यहां माल्टा बहुत होता है। माल्टा संतरे का भाई होता है, रस से भरपूर।

VILLAGE

MALTA

CHAUKHAMBA
इसी गांव से चौखम्भा पर्वत शिखर के प्रथम दर्शन किये।
MANSOONA VILLAGE
सामने नीचे मनसूना गांव दिख रहा है जहां से लगभग साढे चार बजे उनियाना जाने वाली बस मिलेगी। अभी सवा चार बजे हैं। मनसूना तक जाने का रास्ता पक्का पैदल मार्ग है। आराम से पहुंच जायेंगे।
और पहुंच भी गये। उनियाना वाली बस खडी थी। अगर एक मिनट भी लेट हो जाते तो शायद आज उनियाना ना पहुंच पाते। कुछ साल पहले मदमहेश्वर यात्रा मनसूना से शुरू होती थी लेकिन इधर सडक मार्ग का कार्य तेजी से चल रहा है। मनसूना से उनियाना के बीच का रास्ता बेहत खतरनाक है। कहीं-कहीं तो लगता है कि ले भाई, हो गया काम तमाम। हम मैदानी लोगों को लगता है कि सही-सलामत उनियाना पहुंच गये तो पुनर्जन्म हो गया है।
बडे आराम से एक कमरा मिल गया। असल में उनियाना बस अड्डे के पास में ही एक परचून की दुकान है। इसी दुकानदार ने दुकान के नीचे कमरे बना रखे हैं और खाने-पीने का इंतजाम दुकानदार ही करता है।
UNIYANA

UNIYANA

MADMAHESHWAR
यह हमारी देवरिया ताल से उनियाना तक की यात्रा का नक्शा है। देवरिया ताल से मनसूना तक पैदल और उसके बाद बस से।
अब उनियाना के बाद असली सफर शुरू होगा जिसे भरत कहता है कि तीन दिन लगेंगे। उनियाना से मदमहेश्वर की दूरी 22-23 किलोमीटर है और अब हमें इसे तीन दिन में पैदल नापना है।

अगला भाग: मदमहेश्वर यात्रा - उनियाना से गौंडार


मदमहेश्वर यात्रा
1. मदमहेश्वर यात्रा
2. मदमहेश्वर यात्रा- रुद्रप्रयाग से ऊखीमठ तक
3. ऊखीमठ के पास है देवरिया ताल
4. बद्रीनाथ नहीं, मदमहेश्वर चलो
5. मदमहेश्वर यात्रा- उनियाना से गौंडार
6. मदमहेश्वर यात्रा- गौंडार से मदमहेश्वर
7. मदमहेश्वर में एक अलौकिक अनुभव
8. मदमहेश्वर और बूढा मदमहेश्वर
9. और मदमहेश्वर से वापसी
10. मेरी मदमहेश्वर यात्रा का कुल खर्च

23 comments:

  1. घुमक्कड़ी को हृदय से जी रहे हैं आप।

    ReplyDelete
  2. बहुत साहसी हो, वैसे घुमक्कड़ी के लिए सही उम्र भी है।

    ReplyDelete
  3. भाई गज़ब करते हो आप...इतने घने जंगल में एक लकड़ी के सहारे...हमारी तो वर्णन पढ़ के ही घिघ्घी बांध गयी...आप लाजवाब हो जी...कसम से...

    नीरज

    ReplyDelete
  4. माल्टा संतरे का भाई तो
    मौसम्बी (मौसमी) क्या है
    बहन या लुगाई :)

    जै रामजी की

    ReplyDelete
  5. भाई नीरज ,जल्दी बद्रीनाथ पहोचो ,सब्र नही हो रहा
    है |जय बद्रीविशाल |

    ReplyDelete
  6. जारी रखे हम आपके साथ साथ चल रहे है !

    ReplyDelete
  7. लाजवाब
    लाजवाब
    लाजवाब

    ReplyDelete
  8. अरे बाबा हम तो चित्र देख कर ही डर गये जंगल के, कही भाली शालू आ जाता तो तो गये थे ना काम से बाकी यात्रा बहुत अच्छी लगी धन्यवाद

    ReplyDelete
  9. नीरज भाई जी आपकी पोस्ट दिल को सकूँ और पकृति के प्रति आपके प्रेम को दर्शाती है ...बाकि जब जंगल में जाना होता है तो थोडा संभल कर जाया करें ऐसे अनुभव मेरे पास बहुत है ...शुक्रिया

    ReplyDelete
  10. आपको भी नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ईश्वर से यही प्रार्थना है की आने वाला वर्ष आपके लिए खूब सारी खुशियाँ लाये ....धन्यवाद

    ReplyDelete
  11. मुसाफिर आप हैं और आपके ब्लॉग पर आकर मैं भी मुसाफिर बन जाता हूँ .....अगले वर्ष अब सफ़र साथ - साथ तय करेंगे ...शुक्रिया

    ReplyDelete
  12. NAYA SAAL 2011 CARD 4 U
    _________
    @(________(@
    @(________(@
    please open it

    @=======@
    /”**I**”/
    / “MISS” /
    / “*U.*” /
    @======@
    “LOVE”
    “*IS*”
    ”LIFE”
    @======@
    / “LIFE” /
    / “*IS*” /
    / “ROSE” /
    @======@
    “ROSE”
    “**IS**”
    “beautifl”
    @=======@
    /”beautifl”/
    / “**IS**”/
    / “*YOU*” /
    @======@

    Yad Rakhna mai ne sub se Pehle ap ko Naya Saal Card k sath Wish ki ha….
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

    ReplyDelete
  13. Neeraj Ji, Namskar, Yatra ka Varan Bahut Sundar Hain......Wish You Happy New Year - 2011..................................

    ReplyDelete
  14. बडी रमणीक जगह के दर्शन करवाए नीरज भाई। शुक्रिया।

    वैसे एक बात पूछूंगा कैसे इतना समय निकाल लेते हो आप।

    ---------
    साइंस फिक्‍शन और परीकथा का समुच्‍चय।
    क्‍या फलों में भी औषधीय गुण होता है?

    ReplyDelete
  15. जबाब नहीं निसंदेह ।
    यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है ।
    धन्यवाद ।
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

    ReplyDelete
  16. आपके साथ-साथ हम भी तीर्थों और पहाड़ों की यात्रा कर रहे हैं।
    चित्र भी बहुत सुंदर हैं।
    आभार आपका, नीरज जी।

    ReplyDelete
  17. भाई नीरज ,आपको और आपकी फेमिली को नव -वर्ष की हार्दिक शुभकामनाए |
    "नव -वर्ष मे हमेशा ये बहार रहे |
    मेरी शुभकामना हमेशा ये प्यार रहे |"

    ReplyDelete
  18. नीरज सर
    नमस्कार ...आपसे एक मदद लेनी थी ..15 नवम्बर को अपनी बाइक से delhi से उखीमठ,चोपता ,देवरिया ताल घुमने का प्लान है।
    मुझे ये बताये की कौन से रूट से जाना बेहतर रहेगा,हरिद्वार ,ऋषिकेश या फिर कोटद्वार ,पौड़ी वाले रास्ते से?सुबह 6 बजे निकलने
    का प्लान है ..उसी दिन क्या रुद्रप्रयाग पहुच जा सकता है शाम तक।।।।?

    ReplyDelete
    Replies
    1. आप किसी भी रूट से जा सकते हैं, दोनों में कोई ज्यादा फर्क नहीं है।
      दिल्ली से चलकर आप रुद्रप्रयाग तो क्या, ऊखीमठ भी पहुंच जायेंगे।

      Delete
  19. Aap naksa attach krte h ye but acha h:-)
    Him jaiso k lite suvidhajanak h. Dhayavad

    ReplyDelete