Buy My Book

Wednesday, December 15, 2010

भाखडा बांध और भाखडा रेल

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक करें
BHAKRA DAMनैना देवी से फुरसत पाकर मैं वापस नंगल जाने लगा तो रास्ते में भाखडा बांध पडता है। मैं वही उतर गया। सतलुज नदी पर बना है गोविन्द सागर और इस पर है भाखडा बांध। निकट ही भाखडा गांव है जिसके नाम पर बांध को यह नाम मिला। इस बार बडा शानदार मानसून आया था इसलिये गोविन्द सागर ऊपर तक भर गया था। पानी इतना ज्यादा था कि बांध के चारों आपातकालीन गेट खोल दिये गये थे और चारों गेट फुल भरकर चल रहे थे।
अक्सर भाखडा-नंगल को एक ही माना जाता है। लेकिन ये दो अलग-अलग बांध हैं और लगभग बीस किलोमीटर का फासला है। नंगल बांध पंजाब में है और भाखडा हिमाचल प्रदेश में। यह बांध एशिया में दूसरा सबसे बडा बांध (ऊंचाई 225.55 मीटर) है। पहले स्थान पर टिहरी बांध (261 मीटर) है। इसका निर्माण कार्य 17 नवम्बर 1955 को भारत के पहले प्रधानमन्त्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने शुरू किया था। उन्होनें इसे उन्नतिशील भारत का नया तीर्थ कहा था।

BHAKRA DAM
इस तरफ से उस तरफ नाव व मोटर बोट द्वारा होता है।
BHAKRA DAM
बोट की प्रतीक्षा में बैठी सवारियां
BHAKRA DAM

BHAKRA DAM
आधे घण्टे बाद एक बोट उधर से भरकर आ गयी। अब यह इधर से सवारियां भरकर ले जायेगी।
BHAKRA DAM

BHAKRA DAM

BHAKRA DAM
भाखडा बांध के पास नेहरू की प्रतिमा
जब मैं नेहरू की इस प्रतिमा का फोटू खींच रहा था तो सुरक्षाकर्मियों ने तुरन्त टोक दिया कि यहां फोटू खींचना सख्त मना है। मैनें प्रार्थना की कि भाई, एक फोटू बांध का और खींचूंगा। बडी दूर से आया हूं। बोला कि नहीं। असल में बांध के चारों आपातकालीन फाटक खोल दिये गये थे। इसमें से पानी बडे शानदार तरीके से नीचे गिर रहा था। मैं उसी का फोटू खींचना चाहता था।
मैंने नीचे जाती सतलुज को देखा। सामने बायें से एक छोटी सी नदी इसमें मिल रही थी। नदी के उस तरफ एक सडक दिखाई दी। गौर से देखा तो पता चला कि यह तो नंगल जाने वाली वही सडक है जिस पर मैं खडा हूं। मैने चलना शुरू कर दिया। करीब तीन किलोमीटर के बाद मैं उस स्थान पर पहुंचा। यहां से बांध का बडा ही शानदार दृश्य दिख रहा था। मैंने तुरन्त फोटू खींच लिया।

BHAKRA DAM

आनन्द आ गया इसे खींचकर। इसके लिये ही तो मैं तीन किलोमीटर से पैदल यहां आया था। अगर थोडा आ और आगे चला जाऊं तो और अच्छा चित्र आयेगा। कुछ आगे जाकर ऊपर से नीचे तक पूरा बांध दिखने लगा। जैसे ही कैमरा निकाला, एक पुलिस वाले ने आवाज लगाई कि ओये, फोटू मत खींच।
चूंकि यहां से पूरा बांध दिखता है और आने-जाने वाले यहां रुककर इसका फोटू खींचते है, इसलिये इस जगह पर एक पुलिस वाले की ड्यूटी लगी होती है। मैंने उसकी आज्ञा का पालन किया और वहां से चुपचाप आगे निकल लिया। थोडी देर बाद फिर से बांध का शानदार नजारा दिखा तो फिर फोटू खींचने की इच्छा जागी। अबकी बार अच्छी तरह तसल्ली कर ली कि यहां किसी पुलिस वाले की ड्यूटी नहीं है। ले फोटू ही फोटू। दे दनादन फोटू ही फोटू।
BHAKRA DAM
यहां से देखने में लग रहा है कि दो गेट है लेकिन वास्तव में ये चार गेट हैं। चारों से गरजता हुआ पानी गिर रहा है। दूसरी ओर पंजाब की तरफ जाती सतलुज दिख रही है।

BHAKRA DAM
अरे यह क्या??????
रेल का डिब्बा? सतलुज के दाहिने किनारे रेल की पटरी बिछी हुई है और एक डिब्बा भी खडा है। यह क्या मामला है? भारतीय रेल के अनुसार, हिमाचल में केवल तीन स्थानों पर ही रेल लाइन है- कालका-शिमला, पठानकोट-जोगिन्दर नगर और नंगल डैम-ऊना-चुरारू टकराला। नंगल डैम वाली लाइन सीधे ऊना चली जाती है और यहां से कम से कम बीस किलोमीटर दूर है। नंगल डैम स्टेशन कोई जंक्शन भी नहीं है। फिर यहां रेल कैसे?
हां, यह हो सकता है कि जब बांध निर्माण का काम चल रहा था तो सीमेंट-कंक्रीट और भारी मशीनरी लाने के लिये यहां तक रेल लाइन बिछाई गयी हो। अब चूंकि इसकी कोई जरुरत नहीं है तो इसे भारतीय रेल के नक्शे से हटा दिया गया है। यह उसी समय का डिब्बा खडा हुआ है। लेकिन डिब्बे और पटरियों पर साफ-सफाई? इतनी सफाई तो दिल्ली वाले रेल संग्रहालय में भी नहीं है, जबकि वहां दुनिया आती है देखने। यहां कोई नहीं आता, और लाइन बन्द भी है; फिर भी इतनी सफाई?
थोडा आगे चला तो एक पुलिस वाला और दिखा। उससे पूछा कि भाई, इस लाइन पर कोई ट्रेन भी चलती है क्या? यह प्रश्न मेरी जानकारी के हिसाब से मूर्खतापूर्ण था। मैंने सोचा कि इसके जवाब में वो मेरी तरफ पुलिसिया स्टाइल में देखेगा और कहेगा कि हां, राजधानी एक्सप्रेस चलती है। लेकिन जब उसने जवाब दिया तो चौंकने की बारी मेरी थी- “हां, चलती है।” “कहां जाती है? कितने बजे जाती है?”
बोला कि- “अभी साढे तीन बजे हैं। यहां से चार बजे चलती है और सीधे नंगल जाती है। यहां से सीधे चले जाओ, आगे नदी पर एक पुल है। उसी पुल से यह गाडी चार दस के आसपास गुजरती है। पुल पार करते ही ओलिंडा में रुकती भी है।”
मैं पिछले पांच किलोमीटर से पैदल चल रहा था। थक भी गया था। लेकिन उसकी यह बात सुनते ही थकान खत्म हो गयी। पैर तेजी से पुल की तरफ बढने लगे। यह सतलुज पर बना रोड-रेल पुल है। इसी के पास ओलिंडा नामक स्टेशन है।
OLINDA RAILWAY STATION
असल में यह लाइन बनी तो तभी थी जब बांध का निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माण पूरा हो गया तो यह कर्मचारियों को नंगल से लाने-ले जाने के काम आने लगी। आज भी यह भाखडा बांध के कर्मचारियों के लिये ही चलती है। रास्ते में कई स्टेशन पडते हैं जहां से कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य सवारियां भी सफर करती हैं। इस ट्रेन में सफर करने के लिये किसी टिकट की जरुरत नहीं है। ना ही इसमें टीटी होते हैं। नंगल में बस अड्डे के पास एक नहर है। नहर के दूसरी तरफ नंगल टाउनशिप नामक स्टेशन है। यह इसी नंगल भाखडा रेल का आखिरी या यूं कहिये शुरूआती स्टेशन है।
और हां, आम सवारियों को ओलिंडा से आगे भाखडा बांध जाने की अनुमति नहीं है। यह गाडी नंगल टाउनशिप स्टेशन से दिन में दो बार चलती है- सुबह सात बजे और दोपहर बाद तीन बजे।

LABOURHUT RAILWAY STATION
लेबरहट स्टेशन
NANGAL TOWNSHIP RAILWAY STATION
नंगल टाउनशिप स्टेशन
NIRMALA KAPILA
निर्मला कपिला जी, जिनके यहां मैं अपने नंगल प्रवास के दौरान एक दिन रुका था। भाखडा रेल के बारे में इनका कहना है-
“ये स्टेशन भाखडा रेलवे लाईन पर है। इस रेल की एक खासियत है कि इसमे कोई टी टी आदि नही होता । नंगल और भाखडा के साथ लगते गाँवों के लिये ये मुफ्त का वरदान है। वैसे ये भाखडा के मुलाजिमों को ले जाने आने के लिये बनी है। इसमे हर तरह के मनोरंजन के लिये डिब्बे अलग अलग हैं। एक मे रोज़ भजन कीरतन होता है, किसी मे ग्र्वाणी का कीर्तन, किसी मे ताश खेली जाती है और औरतों के लिये अलग से डिब्बा होता है। जिस को जो पसंद है उसी डिब्बे मे चढ जाता है। और कुछ वैसे तुम जैसे मुसाफिरों के लिये भी बिलकुल मुफ्त है, किसी के लिये कोई टिकट नही लेना पडता। ये अपनी तरह की अकेली अनोखी रेल है।”

नैना देवी यात्रा समाप्त।

नैना देवी यात्रा
1. नैना देवी
2. भाखडा बांध और भाखडा रेल

22 comments:

  1. bahut dino baad post lagai.....ghumaakar jaat......fotu bahut badiya lage...

    ReplyDelete
  2. आज कुछ भ्रम दूर कर दिये आपने। अथाह जल देख कर एक विचित्र सी अनुभूति दौड़ जाती है मन में। निर्मला कपिला जी का रेल डब्बों की जीवन्तता के बारे में दिया वक्तव्य बिल्कुल सही है। लगता है शीघ्र मनोरंजन कर लगाना पड़ेगा।

    ReplyDelete
  3. चित्र और निर्मला जी से मिल कर अच्छा लगा।

    ReplyDelete
  4. सुंदर और ज्ञान वर्धक पोस्ट

    ReplyDelete
  5. बैठे बिठाए दुनिया दर्शन करनी हो तो इस बलोग पर आ जाना चाहिए |आभार

    ReplyDelete
  6. फोकट की रेल! पढ़कर ही आनंद आ गया। अब बैठने पर कैसा लगेगा? इस के लिए तो वहीं जाना पड़ेगा।

    ReplyDelete
  7. आपकी बिना टिकट की रेल यात्रा और हमारी भाखरा नंगल यात्रा.

    ReplyDelete
  8. .......बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

    ReplyDelete
  9. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा

    ReplyDelete
  10. भाई जी आनन्द आ गया...आपके भाखरा के चित्र बहुत ही बढ़िया लगे...और नयी रेल लाइन खोजी उसके लिए भी बधाई...तुसी ग्रेट हो जी...


    नीरज

    ReplyDelete
  11. बहुत सुंदर जानकारी जी, रेलवे के बारे सुन कर हेरनगी हुयी, कभी मोका मिला तो जरुर जायेगे यहां भी. धन्यवाद

    ReplyDelete
  12. डैम पर जाते हुए एक जोकरई और होती है, वह है रजिस्ट्रेशन. शुरू में ही कुछ बाबू लोग कुर्सियों पर टिकाए पड़े मिलते हैं जो बड़ी शान ने कुछ कुछ नाम पता जैसा पूछ कर रजिस्टर में भर कर एहसान जताते हैं कि जाओ डैम देखो क्या याद करोगे कि जाने दिया तुम्हें.

    कुछ दूरी पर एक ठुल्ला भी डंडा घुमाता हुआ आपकी कार की तलाशी लेने की एक्टिंग करता हुआ कैमरे के बारे में यूं पूछता है कि आप TNT लेकर डैम फोड़ने जा रहे हो ? उसकी हिम्मत यह कहने की भी हो जाती है कि कैमरा रख जाओ वापसी में ले लेना.

    दूसरी तरफ लोकल और नैनादेवी को जाने वाली सार्वजनिक परिवहन की बसें धड़धड़ाती चली जाती हैं, उसमें भले ही कोई विस्फोट बांध दे तो भी कोई बात नहीं. इस डैम के फोटो तो हम स्कूल की किताबों तक के समय से देखते आ रहे हैं. फिर अब तो गूगलअर्थ का ज़माना है....

    पर इस भाखड़ा डैम बोर्ड के बाबुओं को कौन ठाली समझाए. जनता का पैसा है, इसी तरह के कबाड़ियों की तन्ख्वाहों में झोंके पड़े हैं.

    ReplyDelete
  13. कहाँ कहा घूम के आ जाते हो. और इतना ख़ूबसूरत वर्णन करते हो कि गुस्सा ज्यादा आता है.... तुम्हारे किस्मती होने पर. बहरलाल ऐसे ही घूमते रहो और पोस्ट में तो हम घूम ही लेगे.

    ReplyDelete
  14. बहुत सुन्दर , मगर मेरे भाई ये बतावो नौकरी कब करते हो ?

    ReplyDelete
  15. इस पोस्ट को तो देखा ही नही। कानो मे मेरे नाम की गूँज सुनाई दी तो भागी आयी। सही जानकारी है। आशीर्वाद।

    ReplyDelete
  16. बहुत ही रोचक जानकारी और चित्र भी बहुत अच्छे लगे.

    ReplyDelete
  17. बेहतरीन विवरण। पानी गिरने का दृश्य सही में अद्बुत है।

    ReplyDelete
  18. Neeraj ji , please remove the photo graphs of DAM site these are illegal. This is security lapse. Billions may suffer severely or die from hunger if dam is damaged in enemy action

    ReplyDelete
  19. Neeraj Bhai,
    Maine 17 saal Bhakra Dam pr Naukri ki thi. Purani Yadden Taza ho Gai. AApne itna accha likha maan khush ho gaya. Aap ke blog pr ek yogdan ka link hai. Pr aapne likha hi nahin kitna yogdan dena hota hai. Kher mere teen chote bhai hain. Aap bhi un jaise hi ho. AAp ki ek puri yatra meri tarf se. Yatra ka vivran aur jane ki tarikh likh bhejna. Aur kharcha bi. AAp ko yatra pr bhej kar khushi hogi. My email is : Surinder.Sharma@worleyparsons.com

    ReplyDelete
  20. आपके द्वारा लिखा हर एक विवरण हमेशा लाजवाब होता है

    ReplyDelete